किसान की तराजू | Kishan Ki Tarazu | Hindi Moral Story

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किसान की तराजू

किसान की तराजू का रहश्य:

किसान की तराजू | एक समय की बात हे। एक गांव में एक किसान रहता था शुरू से ही वह व्यापार करता था लेकिन कुछ दिनों से उसका व्यापार ठीक नहीं चल रहा था। और उसकी सारी संपत्ति समाप्त  होने की कगार में थी।  किसान काफी चिंतित रहने लगा वह अपने आप से कहता, क्या करूं मेरी किस्मत काफी खराब चल रही है व्यापार ठीक से चल नहीं रहा है और पैसा की कमी होती जा रही है।

और जल्द ही मुझे कोई ना कोई उपाय निकालना ही होगा नहीं तो ऐसे में तो भूखा ही मर जाऊंगा।  किसान सोच ही रहा था कि तभी वहां उसका छोटा बेटा आ जाता है और वह अपने पिताजी को चिंतित देख कर पूछता है? पिताजी क्या हुआ है आप इतने चिंतित क्यों दिख रहे हो। तभी किसान अपने बेटे से कहता है कुछ नहीं बेटा बस ऐसे ही। फिरसे बेटा पूछता है पिताजी कुछ बात है तो बताइए ठीक है बेटा सुनो तब बस व्यापार थोड़ा ठीक नहीं चल रहा है उसी की चिंता सताए जा रही है।

किसान की तराजू

तभी उसके बेटे कहता है पिताजी आप चिंता ना करें कुछ ना कुछ जरूर होगा हम मिलकर इसका हल निकालेंगे और वो तभी अपने आप में सोचता रहता है और काफी देर सोचने के बाद वह अपने पिताजी से बोलता है पिताजी मेरे पास एक अच्छा उपाय है। किसान अपने बेटे के बात सुनकर कहता है क्या उपाय है बेटा बताओ,  जी पिताजी आपका व्यापार यहां गांव में ठीक नहीं चल रहा है आप क्यों ना शहर जाकर व्यापार करें और फिर वापस गांव आ जाना,  बेटे के बात सुनकर किसान काफी खुश हो जाता है। और खुश होकर अपने बेटे से कहता है हां सोनू यह तो तुमने बहुत ही अच्छा उपाय बताई है ना जाने मेरे दिमाग में यह उपाय पहले क्यों नहीं आया।

सोनू अपने पिताजी से कहता है शांत होकर सोचने  मैं सारे उत्तम विचार ही आते हैं। किसान तुरंत ही शहर निकलने के लिए तैयारी करता है,  और अपने कमरे  के अंदर चला जाता है और अपने सबसे प्यारे और सबसे कीमती सामान तराजू को देखने लगता है।  किसान के लिए उसकी तराजू सबसे अनमोल थी वह 20 किलो की सबसे पुरानी तराजू थी और ओ सोचने लगता है “मैं तराजू कहां रखूं घर में मेरा बेटा इसका देखभाल नहीं कर पाएगा मुझे इस तराजू को एक अच्छी जगह रखना होगा। उसी समय सोनू वहां आ जाता है और अपने पिताजी से कहता है पिताजी आपे तराजू अपने सेठ मित्र के यहां रख कर चले जाइए वह अच्छे से   संभाल कर रखेंगे।

किसान अपने बेटे के   बात से खुश होकर कहता है ठीक कहा बेटे मैं तराजू अपने मित्र को दे कर चला जाऊंगा ओर वापस लौटकर फिर उससे ले लूंगा।  किसान अपने अनमोल तराजू को लेकर तुरंत अपने  सेठ मित्र के पास जाता है, उसका मित्र दुकान पर बैठा हुआ था वहां जाकर किसान अपने मित्र से कहता है, “मित्र मुझे तुमसे एक मदद चाहिए थी। तब उसके मित्र कहता है जी जरूर मैं तुम्हारा  क्या मदद कर सकता हूं? किसान तभी कहता है मित्र सिर्फ मेरा ए अनमोल तराजू है जो काफी पुरानी है और काफी कीमती भी है यह 20 किलो का तराजू है शहर जा रहा हूं वापस आकर मैं तुमसे यह ले लूंगा इसे तुम संभाल के  कृपया करके रख दो अपने पास।

किसान की तराजू

किसान के मित्र तराजू को रख लेता है।  किसान अपने मित्रों को धन्यवाद कह कर वहां से  चला जाता है,  और घर आकर अगले दिन ही शहर के लिए रवाना हो जाता है।  शहर में जाकर उसका व्यापार काफी अच्छा चलता है और काफी पैसे भी  कमाता है। 

किसान की तराजू

और अच्छा खासा पैसे कमाने के बाद वापस अपने गांव आ जाता है घर आते ही वह अपने बेटे से मिलता है। बेटे  अपने पिताजी को देखकर पूछता है पिताजी आप कैसे हो ,  और उसके पिताजी जवाब में कहता है बढ़िया हो बेटे मैंने तुम्हारे लिए ढेर सारी मिठाईयां लाया हूं किसान अपने बेटे को मिठाइयां और खिलौने देता है और खिलौने देने के बाद वह अपने बेटे से कहता है बेटे तुम यहीं रुको मैं अपने सेठ मित्र से अपनी तराजू लेकर आता हूं।

और  वह वहां से अपने मित्र के पास  चला जाता है, सेठ मित्र दुकान में बैठा हुआ था किसान जाता है अपने मित्र के पास और कहता है मित्र मैं अब वापस आ गया हूं अब मेरी अनमोल तराजू वापस कर दो।  सेठ अनमोल तराजू को लेकर पहले से ही  लालच में आ चुका था वह कीमती तराजू को लौटना नहीं चाहता था। और सेठ मित्र अपने मन ही मन  मैं सोचने ही लगा मैं वह अनमोल तराजू कैसे दूं कितनी कीमती है मुझे ओह रख लेना चाहिए, और वो अच्छी खासी पैसे में बैच सकता हूं मैं।

और लालच में आकर सेठ अपने मित्र से कहता है  वह 20 किलो का तराजू तो  चूहा खा-गया क्योंकि मैंने ध्यान नहीं दिया और सारे चूहे ने तराजू को खा गया।  किसान यह सुनकर मन ही मन में गुस्से में आ जाता है, कारन किसान की तराजू ही उसके दादा जी की अमानत थी , फिर ओह कपटी दोस्त से  बदला लेने की सोचता है। कुछ देर बाद सोचने के बाद वह कहता है।

जाने दो मित्र तराजू गया तो क्या हुआ छोड़ो,  मित्र मुझे नदी में स्नान  करने जाना है तुम मेरे साथ अपने बेटे को भेज सकते हो? उसके साथ जाकर सफर का पता नहीं चलेगा। सेठ बिना कुछ सोचे अपने बेटे को उसके साथ भेज देता है और किसान की तराजू लेकर मन ही मन  खुश होता है।  किसान अपने मित्र के बेटे को लेकर रास्ते में चलते चलते सोचता  रहता है, और कुछ दूर जाकर सेट के बेटे को एक गुफा में बंद करके वापस सेठ के यहां आ जाता है। किसान को अकेला आता देख सेट पूछता है मित्र तुम अकेले हो मेरा बेटा कहां है? उसके जवाब में किसान कहता है  क्या बताऊं मित्र उसे कव्वे ने उड़ा कर ले गया।

यह सुनते ही सेठ गुस्सा हो जाता है और गुस्से में बोलता है एक कौवा इतना बड़ा बच्चे को कैसे लेकर उड़ सकता है।  तक किसान हंसता हुआ कहता है जरूर लेकर उड़ सकता है अगर एक चूहा 20 किलो का तराजू खा सकता है तो कौवा भी तुम्हारे बेटे को लेकर उड़ सकता है। यह सुनते ही सेट समझ जाता है और रोने लगता  है, और रोते हुए कहता है मुझे माफ कर दो मित्र मैंने तुम्हारा अनमोल तराजू छुपा रखा है मैं तुम्हारे तराजू लौटा देता हूं, तुम भी  मेरे बेटे को लौटा दो।  सेठ किसान की तराजू लौटा देता है और किसान भी सेट को उसके बेटे को लौटा देता है और इस प्रकार किसान अपने तराजू को कपटी दोस्त से बचा लेता है।

 संदेश

हमें हमेशा अपने बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए, और कपटी दोस्त को अपनी कीमती सामान नहीं दिखानी चाहिए।

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