किसान के जूते की रहस्य | Kishan Ki Jute

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किसान के जूते

किसान के जूते:

किसान के जूते |  एक समय  की बात ही। जब एक बेहद गरीब किसान अपने परिवार के साथ एक छोटी सी झोपड़ी में रहता था। वह काफी गरीब था और घर चलाने के लिए मजदूरी किया करता था।  फिर एक दिन किसान अपने आप से कहता है, मुझे काम के लिए जाना चाहिए काफी देर हो रही है। और वो अपना थैला लेकर काम करने चला गया।  वहां उसे देखकर दूसरा मजदूर बोला क्या मित्र कैसे हो?  बातें सुनकर किसान  कहता है  “ सब बढ़िया है मित्र बस जैसे-तैसे जिंदगी कट रही है।

उसके बात किसान और सभी मजदूर काम करने लगते हैं,  और काफी देर तक काम करते रहते हैं,  वहीं कुछ दूर में ही एक गुरुकुल था वहां एक गुरु अपने छात्रों को शिक्षा दिया  करता था। उस गुरुकुल मे चिंटू नामके एक छात्र, एक दिन अपने मित्र सोनू के पेंसिल छुपा  दी।  सोनू अपने पेंसिल को ना पाकर अपने मित्रों को पूछता है पेंसिल के बारे में? मित्र सभी जवाब देते नहीं सोनू तुम्हारी पेंसिल मैंने तो नहीं देखी है।

सोनू फिर  अपने दूसरे मित्र से पूछता है मित्र तुमने  मेरी पेंसिल देखी है मैंने कुछ देर पहले ही अपने बैग में रखा था अभी तो मुझे मिल  नहीं रहा है।  वह एक-एक करके अपने सारे दोस्त से पूछता रहता है,  और कुछ ही देर में सोनू काफी परेशान हो जाता है और इधर उधर ढूंढता रहता है!  सोनू को इस तरह परेशान देख चिंटू को काफी मजा आता है और वह मन ही में खुश होकर कहता है कितना मजा आ रहा है  इसे परेशान देख कर शरारत करने में कितना मजा आता है।

और  फिर थोड़ी ही देर में वहां गुरुजी आ जाते हैं सोनू को इस तरह इधर-उधर घूमता देख उनसे पूछते हैं क्या हुआ सोनू तुम इस तरह दुखी क्यों हो। तब सोनू जवाब मैं कहता है गुरु जी मेरी पेंसिल नहीं मिल रही है। गुरुजी सोनू के बात सुनकर एक नई पेंसिल सोनू को देता है  और पढ़ाना शुरू करते हैं। पर अभी भी चिंटू की शरारत कम नहीं हुई थी गुरुजी पढ़ाई ही रहे थे, कि चिंटू ने चुपके से सोनू की कॉपी छुपा दी।

उसके बाद मन ही मन में चिंटू कहता है अब काफी! मजा आएगा अब सोनू किस पर लिखेगा देखूं तो। कुछ देर बाद जब सोनू लिखने के लिए अपनी कॉपी निकालने जाता हे, तभी ओ देखता हें उसकी कॉपी गायब थी वह फिर से परेशान हो चुका था और रोना चालू कर दिया। उसे रोता देख गुरु जी पूछते हैं अब क्या हुआ सोनू तुम क्यों रो रहे हो।

तब सोनू कहता है गुरु जी क्या बताऊं मेरी कॉपी नहीं मिल रही है किसी ने मेरी कॉपी छुपा दी।  सोनू के बातें सुनकर, गुरुजी काफी गुस्से में आ जाते हैं और गुस्से में कहते किसने शुभा यह सोनू की कॉपी  ली..  जल्दी से बताओ।  पर गुरु जी के बातें सुनकर  कोई भी जवाब नहीं देता है, गुरूजी फिर से चिल्लाते हुए बोलते हैं जल्दी से बताओ नहीं तो मैं सब की बैग की तलाशी लूंगा, और फिर उसे कड़ी सजा दूंगा। ए बाते सुनते ही चिंटू डर जाता है और सोनू की कॉपी को दूसरे के बैग में डाल देता है और जैसे ही डालता है उसकी वक्त गुरुजी की नजर उस पर पड़ जाती है। और गुरुजी वह देखकर अपने मन ही मन में विचार करते  है कि चिंटू को आराम से समझाना होगा तभी यह समझेगा।

और गुरु जी तभी बच्चों से कहते हैं मैं आज नहीं पड़ाऊँगा कल से ही पड़ाऊँगा और तभी बच्चे वहां से जाने लगते हैं। चिंटू जा ही रहाथा की उसे गुरुजी बुलाते हैं, ओर कहते हैं चिंटू चलो बाहर घूमते हैं दोनों चलही रहे थे तभी उन्हें रास्ते में ही गरीब किसान के जूते  छूटी हुई मिलती है।  उस जूते को देखकर चिंटू के मन में फिर से शरारत  सूझती  है, और वह गुरुजी से कहता है हमें जूते छुपा देनी चाहिए और वह  जब अपने जूते   खोजेंगे तो मजा आएगा।

यह सुनते ही उसके गुरुजी उसे  डांटते हुए बोलते तुम जूते छुपाने की जगह जूते में कुछ पैसे रख कर देखो फिर देखो क्या होता है। और  गुरुजी जूते पर पैसे रखकर छुपकर देखने लगते हैं,  थोड़ी ही देर में वहां एक किसान आता है और जूते पहनता है जूते पहनने के बात उसके पैरों में कुछ चुबता है वह जूते उठा कर देखता है की, उसमें उसे पैसे के सिक्के दिखते हैं फिर किसान दूसरे जूते में देखता है दूसरे जूते में भी उसे पैसे दिखते हे, पैसे देखकर किसान रोते हुए कहता है अपने आप से हे भगवान तेरा लाख-लाख “सुकर..” है यह पैसे देकर तूने बहुत उपकार किया है। अब मेरी पत्नी के बीमारी का इलाज हो जाएगा अब हम आज पेट भर के खाना खा सकते हैं।

चिंटू और गुरु जी दोनों  पेड़ के पीछे चुप कर देख रहे थे, ओ देख कर चिंटू के आंखों में आंसू आ जाता है, और चिंटू सब  समझ चुका था। चिंटू के आंखों में आंसू देख कर गुरु जी कहते हैं बेटा दूसरे की मदद करो तुम्हें ज्यादा खुशी मिलेगी दूसरों को परेशान करने में जो मजा आता है वह सब व्यर्थ है। दूसरों की मदद करके देखो बहुत ही अच्छा महसूस होगा। उस दिन से चिंटू की  आंखें खुल जाती है और वह कभी शरारत नहीं करता है और सोनू की कॉपी भी लौटा देता है।

 संदेश:

हमेशा दूसरों की मदद करो दूसरों की मदद करके काफी खुशी महसूस होगी दूसरों की खुशी में ही अपना खुशी ढूँढे।