चन्दन और कोयला | Chandan Or Koylah Ki Hindi Kahaniya

  • by
चन्दन और कोयला

चन्दन और कोयला की अद्भुत कहानी-:

ये कहानी एक किसान और उसके पुत्र की है, उसके पुत्र का नाम सिंटू था, सिंटू

बचपन से ही काफ़ी शरारती और बदमाश हुआ करता था……

सिंटू के हर दिन कोई ना कोई शिकायत आती रहती थी….

एक बार सिंटू अपने दोस्तों के साथ फूट-बल खेल रहा था…..

सिंटू : (दोस्तों से बोलता है) गोलू मेरी तरफ बोल मार ….

गोलू : हां मै फेकता हूँ…

सिंटू : यार जल्दी बॉल मारो ….

गोलू : रुक जाओ यार…. थोड़ी देर रुको तो…

सिंटू : यार इधर की गोल खाली है… जल्दी मारो तो मै

गोल कर दूंगा….

गोलू : ठीक है रुक….

गोलू तुरंत अपने पैरो से बल सिंटू की तरफ मारता है….. सिंटू के पैर के पास बॉल

आते ही वो अपनी पैरो से फूटबॉल को गोल की तरफ मारता है…. लेकिन वो ‘बल’ एक लड़के को लग जाती है…..

वो लकड़ा गुस्से मे तेज दौड़ता हुआ आता है और सिंटू को मारने लगता है….

लड़का : (गोलू को मारते हुए बोलता है) मै नहीं छोरुंगा तुझे….

वो सिंटू को मार कर वहां से जाने लगता है….. तभी सिंटू का मित्र गोलू….. सिंटू

को बोलता है….

गोलू : सिंटू तू उसे भी मार…

सिंटू : नहीं यार छोड़ दे…. मेरी गलती थी…

गोलू : तेरी गलती थी… पर उसे तुझे मारना नहीं चाहिये था…

सिंटू : छोड़ यार…गोलू बार बार अपने मित्र सिंटू को बहकाता रहता है, और अंत मे सिंटू से कहता

है….

गोलू : सिंटू ये पत्थर फेक कर उसे मार दे….

मजबूरन सिंटू पत्थर उठाता है और फेक कर सीधा उस लड़के के सिर पर मारता है, पत्थर लगने की वजह से उसके सिर पर खून बहने लगती है….

दूसरी तरफ गोलू अपने मित्र से भागने के लिए कहने लगता है…

गोलू : सिंटू अब भागो…

सिंटू और गोलू दोनों भाग जाते है…. और जाकर कही छुप जाते है….रात होती है…. रात मे सिंटू अपना भोजन कर रहा था…. खाते बक्त ही गोलू और गोलू के कुछ बदमाश दोस्त सिंटू के घर के पास आ गए और

बाहर से ही वो चिल्लाने लगे…..सिंटू के दोस्त गोलू कहता हे सिंटू…. बाहर खेलने चले… अंदर सिंटू अपना खाना खा रहा होता है, अपने दोस्तों  की आवाज़ सुनकर वो उठ कर

बाहर आने लगता है……. सिंटू को बाहर आता देख सिंटू के पिताजी बोलते है….

सिंटू के पिताजी : बेटा कहा जा रहे हो…

सिंटू : पापा बाहर खेलने जा रहा हूँ….

सिंटू के पिताजी : बेटा रात हो चुकी है… इतनी रात को नहीं खेलना चाहिये….

सिंटू : पापा मुझे दोस्तों के यहाँ पढ़ना भी है…

सिंटू के पापा : पर बेटा रात मे अपने घर पर रहना चाहिये….

सिंटू : नहीं पापा… मुझे जाना है…

सिंटू के पापा : बेटा तब खाना खाते हुए जाओ…

सिंटू : नहीं पापा….मुझे नहीं खाना है…. बाद मे खा

लूंगा……

सिंटू इतना बोलकर वो तेजी से अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर चला जाता है, उसके पिताजी सिंटू को देख कर समझ जाते है की सिंटू गलत संगित मे फस चूका

है….

सिंटू के कुछ ही देर जाने के बाद वहाँ, चोटिला लड़का अपने पिताजी के साथ सिंटू के

घर पर आ गया….

लड़का : (अपने पिताजी से बोलता है) पिताजी यही घर है सिंटू का…

बाहर खड़े सिंटू के पिताजी बोलते है…

क्या हुआ बेटे….

लड़का : सिंटू ने मेरे सिर पर एक बड़ा सा पत्थर मारा है और

पत्थर मार कर वो अपने दोस्तों के साथ भाग गया…

लड़का के पिता : आप अपने पुत्र को समझाओ …देख रहे हो मेरे बेटे

का क्या हाल किया है उसने….

सिंटू के पिता : मुझे माफ़ कीजिये…. मै अपने बेटे की तरफ से

माफ़ी मांगता हु… मै अपने बेटे को जरुर

समझाऊंगा….

लड़का के पिता :

ठीक है…

इतना बोलकर वो अपने बेटे को लेकर चले जाते है….

इधर सिंटू के पिताजी अपने घर मे बैठ कर परेशान हो रहे थे,

उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था,  की वो सिंटू को कै से समझाये….

सिंटू के पिता : (अपने आप से बोलते है) मै क्या करूँ… कै से समझाऊ अपने बेटे को….

सिंटू के पिता : मुझे जल्दी ही अपने बेटे को उसके बुरे दोस्तों से बचाना होगा….नहीं तो काफ़ी देर हो जाएगी…. सिंटू के पापा वहा बैठ कर सोचते रहते है….

थोड़ी देर बाद वहां सिंटू आता है…..

सिंटू : पिताजी अब मै सोने जा रहा हु…

सिंटू के पिताजी : ठीक है बेटा तुम सोने चले जाना…. पर उससे पहले मेरा एक काम कर दोगे…

सिंटू : हां पिताजी बोलिए…

सिंटू के पिताजी : मै कल गाँव से बाहर जा रहा हु….कुछ दिनों बाद

आऊंगा….. उसके पहले कुछ काम सिखाने हे तुम्हे…

सिंटू : ठीक है पिताजी….. बोलिए क्या करना होगा…..

सिंटू के पिताजी : बेटा थोड़ा चन्दन और कोयला ले आओ….

सिंटू कोयला और चन्दन सुनकर सोचने लगता है…. वो अपने पिताजी से बोलता है…

सिंटू : पिताजी इसका क्या काम…

सिंटू के पिताजी : बेटा पहले तुम ले आओ… सिंटू बिना कुछ सोचे रसोई घर चला जाता है, वहा वो एक हाथ से कोयला उठा लेताहै और फिर वो चन्दन ढूंढने लगता है, थोड़ी ही देर मे उसे चन्दन भी मिल जाता है.. सिंटू एक हाथ मे कोयला और दूसरे हाथ मे चन्दन ले आता है…

सिंटू : ये लो पिताजी… मै ले आया..

सिंटू के पिताजी : बेटा अब इसे वहां फेक दो…. सिंटू  वैसा ही करता है, वो चन्दन और कोयला को फेक देता है… सिंटू के पिताजी उसके एक हाथ को पकड़ते है  जिस पर कोयले की वजह से दाग़ लगचुकी थी…. वो अपने बेटे को कुछ समझाते है…

सिंटू के पिताजी : ये देखो बेटे… ये गन्दा हाथ है जिस पर कोयलाफेकने के बाद भी कोयले के दाग़ लगे हुए है….. असल जिंदगी मे भी ऐसा ही होता है… बुरे दोस्तों केसाथ रहोगे… तो उसके जाने के बाद भी उसकी बुराइयाँ रह जाती है…

सिंटू के पिताजी अब उसका दूसरा हाथ उसे दिखाते है…

सिंटू के पिताजी : ये देखो… ये चन्दन की हाथ है…चन्दन फेकने के बाद भी ये खुसबू दे रहा है… ये ठीक अच्छे दोस्तों की तरह होते है …. अच्छे दोस्तों के रहने पर ज्ञान मिलता है…. और उसके चले जाने पर भी ज्ञान,काम में आता है…. सिंटू के पिताजी अपने बेटे को अच्छी तरह समझाते है…. सिंटू के पिता : समझे बेटे…

सिंटू की आँखों मे आंसू आ चुके थे, सिंटू अपनी पिता की बात समझ चूका था… उसने कसम खाई की अब वो गलत दोस्तों के साथ कभी नहीं रहेगा और हमेसा अच्छे दोस्तों के साथ ही रहेगा……

सन्देश-:

सदैव अच्छे  दोस्तों के साथ रहो, अच्छे दोस्त  हमेसा अच्छी बाते ही बतायेंगे जो जिंदगीमे सदैव काम आती है|