जादुई कुवां |Horror Story | The Magical Well

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इस कहानी हे चार करैक्टर की जिनमे हे राजू ,रामू काका , आदमी 1 , भूत )

 -: जादुई कुवां :-

बोहोत साल पहले की बात है रायगंज नाम का एक गााँव था | रायगंज , आस पास के सभी गााँव में अपने जादुई कुंवे के लिए जाना जाता था |

इस जादुई कुंवे की खासियत थी की जाब भी कोई नेक इंसान इस कुवे से कुछ मांगता तो वो कुया तुरंत उसकी इच्छा पूरी कर देता |

उस गााँव में राजू नाम का एक इंसान रहता था जो बोहोत इमानदार था और हमेशा सबकी मदत करता | जादुई कुवा पुरे गााँव में सिर्फ राजू की ही इच्छा पूरी करते | इसलिए गााँव के सभी हर परेशानी में राजू के पास जाते कयूाँ की उन्हें पता था की जादुई कुया सिर्फ राजू की ही बात मानेगा |

(राजू आपने घर के आंगन में बैठा है )

(कुछ लोग उसके पास आते हें)

पहला आदमी : राजू  भैया कया बात है आप बहार बैठे हैं ऐसे !

राजू : कुछ नहीं भाई बॉस थोडा आराम कर रहा हूँ , पूरा दिन काम भी तो करना है ना |

पहला आदमी : भैया आप से एक मदत चाहिए .. एक परेशानी आ खाड़ी हुई है …

राजू  : कया हुआ भाई ..

पहला आदमी : वो बात ये है की मुझे शहर में नौकरी मिली है ..

राजू  : ये तो बोहोत खुसी की बात है , इसमें परेशानी कैसी ??

पहला आदमी : दरअसल मेरे जाने के बाद मेरे परिबार को एक मलहना बोहोत कष्ट होगा .. अगर आप जादुई कुए से थोड़े खानेका सामान और पैसे माँगा देते तो बोहोत उपकार होता आपका …

राजू : क्यूँ नहीं भाई ज़रूर … अभी चलो मैं साथ आता हूँ …

(दोनों जाने लगते है )

(जादुई कुए के पास )

राजू : ए जादुई कुवे मुझे ढेर सारा खाने का सामान और कुछ पैसे चाहिए !

(जादुई कुवा दे देता है )

राजू : ये लो तुम्हारे परिबार के लिए सामान …

पहला आदमी : भैया आप इसमें से कुछ रख लेते तो मुझे बोहोत अच्छा लगता |

राजू : नहीं भाई ये तुम्हारी अमानत है .. इसे तुम आपने परिबार को शॉप दो ..

पहला आदमी : आपका बोहोत बोहोत शुकुरिया …

राजू : ठीक है आब में चलता हूँ , निश्चिंत होकर आब तुम शहर जाना |

(राजू वहां से जाने लगता है )

(रास्ते में एक दुकान के सामने खड़ा होता है –रामू  दुकानदार )

राजू : और रामू काका कैसे हो ?

रामू : बस ठीक है सब बेटा , कट रही है जिंदगी |

रामू : बताओ बेटा कया दूँ ?

राजू : वेसे तो मुझे कुछ घर का सामान चाहिये , पर आप इतने उदास क्यूँ  दिख रहे है ??

रामू : आगले महने मेरी बेटी की शादी है ,बोहोत खर्चा होने वाला है पर मेरी आमदनी आब भी बोहोत काम है |

राजू : अच्छा तो ये बात है , तो आप जादुई कुवे से मदत कयूाँ नहीं मांग लेते |

रामू : अब बेटा बार बार तुम्हे परेसान करना भी तो अच्छा नहीं लगता ना |

राजू : अरे चचा आप मुझे आपना बेटा ही समझे , और बेटे से कैसा शर्मना |

राजू : ठीक है काका कल मैं आप को जादुई कुवे के पास ले जाऊंगा | अभी मुझे कुछ सामान दे दीजिये |

रामू : ठीक है बेटा …

(दुकानदार सामान देने लगता है )

अगले दिन सुबह राजू  फिरसे दूकानदार के पास जाता है …

राजू : काका कैसे है …

रामू : हा बेटा ठीक हूँ ..

राजू : चलिए जादुई कुवे के पास चलते है …

रामू और राजू दोनों जादुई कुवे के लिए रवाना होते है….

(चलने की दौरान )

राजू : लो काका हम जादुई कुवे के पास पोहच गए ….

रामू  : हा बेटा ….

राजू  : ये जादुई कुवे मुझे ढेर सारा खाना और कुछ पैसे चाहिए |

(जादू होता है )

राजू : लीजिये काका ये सब तुम्हारे ही हैं |

रामू : बेटे मैं कैसे तुम्हारा शुकुरिया करूँ! तुमने मेरा बोहोत बड़ा उपकार किया है …

राजू : अरे काका जाने भी दो , आपकी मदत्त मैंने नहीं जादुई कुवे ने किया है … शुकुरिया भी जादुई कहें ..

राजू : आप का शुकुरिया जादुई कुवे …

दोनों इसके बाद आपने आपने घर लौट जाते हैं ..

(पुच वाला भूत रामू के घाट के बहार के पेड़ में )

भूत : ये राजू तो गााँव की सबकी मदत किये जा रहा है , लगता है मुझे कुछ करना होगा , तभी मैं इस गााँव की बर्बादी देख पाउँगा | ही ही ह ही ही …

(भूत भेस बदल कर एक इंसान बनजाता है …)

(राजू का दरवाज़ा ख़त खता ता है ..)

राजू : कौन है बहार ? रुको आता हूँ..

(राजू दरवाज़ा खोलता है ..)

राजू : आप कौन है काका ?…

भूत : बेटा मैं एक मुसाफिर  हूँ ..बोहोत ठक गया हूँ कया मैं यहााँ थोडा आराम कर सकता हूँ ?

राजू : ज़रूर काका … रुको मैं पानी ले अत ह ाँ..

(राजू जाता है और थोड़ी देर में पानी ले अता है )

राजू : काका ये लीजिये पानी …

भूत : तुम्हारा धन्नेवाद बेटे..

भूत : बेटा जब में यहााँ आ रहा था तो लोग राजू के बारेमे कुछ बात कर रहे थे ..

राजू : मैं ही राजू  हूँ ..सायद मेरे बारेमे कर रहे थे ..

भूत : तब तो बोहोत बुरा हुआ …

राजू : क्यूँ काका ..

भूत : बेटा वो कह रहे थे की राजू बोहोत ही मुर्ख इंसान है , हमेशा लोग उसे उल्लू बनाते है …और कुवे का सामान लेते है ..

राजू : काका सायद आप से कोई गलती हुयी है .. मुझे सब बोहोत प्यार करते है ..

भूत : बेटा तुम.. मैं तो कहता हूँ तुम इन धोखे बाज गााँव वालो की मदत करना छोड़ दो और जादुई कुवे का सारा सामान निकल कर किसी और जगह जा कर बस जाओ ताकि तुम एक रजा की तरह जिंदगी बिताओ ..

राजू : नहीं काका मुझे रजा नहीं बनना !

भूत : बेटा आज तक तुमने आपने लिए मााँगा ही कया है … तुम आपने लिए कुछ मांगो .. अपने लिए… और वो भूत राजू को भड़कता रहता है …

(कुछ देर बात चलती रहती है )…

भूत : है बेटा आब मैं चलता हूँ ..

राजू : ठीक है काका … आरामसे जाइये ..

(भूत चला जाता है ..)

अगले दिन सुबह रामू उठकर जादुई कुवे की तरफजाने लगता है …

(चलते चलते )

राजू : काका ने सही ही तो कहा है , मैंने पूरी जिंदगी कुछ भी तो नहीं मााँगा कुवे से ..इस कुवे पर सिर्फ मेरा हक है .. कोई भी इसका खज़ाना नहीं ले सकता …

(राजू पोहोच जाता है )

राजू : ये जादुई कुवे मुझे बोहोत दौलत चाहिए ..

( बोहोत सारा सोना आ जाता है )

राजू : ये जादुई कुवे मुझे पैसे चाहिए …

(आ जाता है )

राजू : ये कुवे मुझे गााँव का सबसे आमिर इंसान बनना है …

(जादू होता है कुवे से रोशनी आती है )

कुवा : राजू .. तुम बोहोत बदल चुके हो … तुम्हारे दिल मैं भी लालच भर गया है … इसलीये अब में तुम्हारी कोई इच्छा पूरी नहीं करूाँगा … और ये गााँव आब गरीबी मैं ही जियेगा …

(सारा पैसा डोलात गायब हो जाती है )

(जादुई कुवे का रंग बदल जाता है ..)

राजू : ये मैंने कया कर दिया ! मैंने आपने लालच की वजह से पुरी गााँव की किश्मत ख़राब करदी .. मैं कभी आपने आप को माफ़ नहीं कर पाउँगा … मैं कुए में कूद कर आपने पाप का प्राश्चित करूँगा…

कुवा : रुको मेरे बच्चे !

कुवा : ये कया करने जा रहे हो ! गलती तुमने की है और समय रहते तुमने आपनी गलती को जान भी लिया है … अगर इंसान को अपनी गलती का एहसास हो जाये तो उसे उस गलती को सुधारना चाहिए … कभी अपने गलती से हारकर गलत कदम ना उठाना …

राजू : ठीक है जादुई कुवे …

कुवा : जाओ और याद रखना तुम अब भी एक अच्छे इंसान हो ..मैं आब भी तुम्हारी हर इच्छाएं पूरी करूँगा…

राजू : आप का बोहोत बोहोत शुकुरिया .. मैं भी अब बोहोत मन लगाकर काम करूाँगा …

(समाप्त ) {जादुई कुवां}