जादुई छड़ी की कहानी | The Magical Stick| Jadui Lathi

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जादुई छड़ी

जादुई छड़ी की कहानी-:

एक गांव मे ‘गोलू’ नाम का एक बहुत ही ईमानदार बच्चा था। वो काफ़ी मासूम और काफ़ी अच्छा बच्चा था। ओ अपने स्कूल के लिए तैयार होते वक्त , माँ से जल्दी से खाना लाने के लिए बोल रहा था। और उसकी माँ उसके लिए खाना लाती है और टेबल पर परोस देती है। उसके पिताजी भी साथ मे बैठ कर खाना खा रहे थे। तबही गोलू के पापा आते हे, और कहते गोलू से की “बेटा सारा खाना ख़त्म करना। जवाब मे कहता हे गोलू हां पिताजी मै सारा खाना ख़त्म करूँगा।

जादुई छड़ी की कहानी | The Magical Stick| Jadui Lathi | Stories Hindi

गोलू खाना खाने के लिए टेबल पर बेठने जाते ही दरवाजे पर कोई बुड्ढा भिकारी आता है।और कहता हे कोई है क्या घार में! मुझे कुछ खाने को दे दो मुझे बहुत जोर की भूख लगी है बहुत दिनों से खाना नहीं खाया हूँ। बात सुनकर गोलू दौड़ता हुआ किचन मे जाता है और ‘रोटियां- सब्जी’ लेकर उस बूढ़े आदमी को दे देता है। बूढ़े भिकारी खुश होकर जवाब मे कहता हे बहुत बहुत सुकुरिया बेटे तुम बहुत ही अच्छे बच्चे हो। गोलू के पापा खड़े खड़े सब देखते “हें ” और सबाशी देकर गोलू को बोलते हें, बेटा तुमने ये बहुत ही अच्छा काम किया है। बूढ़े भिकारी वहा से रोटियां लेकर चला जाता है और सभी फिर से खाना खाने बैठ जाते है। गोलू खाना खा लेते ही उसके पिताजी उसे स्कूल पर छोर देते हे।

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कुछ देर बाद गोलू और गोलू के पापा दोनों सड़क से चलते हुए जा रहे थे की ‘तबही’ वहाँ फिर से एक ब्रिध्धा भिकारी मिल गया।और ओ खाने के लिए कुछ पैसे मांग रहा था ? दयालु गोलू अपने पापा से कहता है, पापा इन्हें पैसे दे दीजिये। पर पिताजी पैसे देने को साफ़ इंकार कर देता हे और बेटे को बोलता हे स्कूल चलो। पर गोलू काफ़ी जिद करने लगता है और पापा के साथ जाने से मना कर देता है, “पापा अगर आप इसे पैसे नहीं दोगे तो मै स्कूल नहीं जाऊंगा”। पापा को बेटे के जिद के सामने झुकना ही होता है , और ओ अपने पास से पैसे निकलकर उस गरीब बुड्ढे को दे देते है। ब्रिधा भिकारी बहुत बहुत सुकुरिया बेटे कह कर चले जाता हें। गोलू ख़ुशी खिशी अपने पिताजी के साथ स्कूल आ जाता है और वहां पढ़ना चालू कर देता है। गोलू और किसान दोनों साथ मे बैठ जाते है, किसान गोलू से कहता है गोलू तुम्हारे पास दो पेंसिल है, और गोलू कहता हें हां है -ना तुम्हे चाहिए क्या ये लो’ |

गोलू तुरंत अपने बैग से एक पेंसिल निकल कर किसान को दे देता है, किसान धन्यवाद बोलकर गोलू से पेंसिल लेलेता हे। इस तरह सबकी मदत करता रहता था, और सब उसकी काफ़ी तारीफे करते थे। स्कूल मे छुट्ठी होती है और गोलू स्कूल से सीधा अपने घर आ जाता है घर पर आकर भोजन करके आराम करता है। रात के समय जब गोलू अपने कमरे मे पढता है, तभी वहा खिड़की से तेज हवा आने लगती। तभी गोलू अपने आप से कहत हे ‘ये खिड़किया हिल क्यूँ रही है?, और अचानक इतनी तेज हवा कहा से चलने लगी। मुझे उठकर देखना चाहिये |

ओ उठकर खिड़किया के पास जाता है वहा देखता है की एक बूड़ासा आदमी चमकते हुए कपड़ा पेहेन रहा है, और वो हवा मे लकड़ी पर बैठा उड़ रहा है देखेते ही वो उड़ता हुआ आदमी गोलू से बोलता है, बेटा मुझे पहचाना ? जवाब मे गोलू कहता हे नहीं तो | उस आदमी ने फिर से कहा ‘गौर से देखो’ गोलू गौर से उस आदमी को देखता है और उसे याद आ जाता है “ओ आदमी तो घर पर रोटी मांगने” आए थे |सही कहा बेटा मै भिकारी बन कर तुम्हारे यहाँ आया था, मै उड़ने वाला आदमी आसमान से आया हूँ

तुम एक अच्छे बच्चे हो इसलिए मे तुम्हे एक जादुई छारी देता हूँ इससे तुम कभी भी किसी को गायब कर सकते हो, उड़ता आदमी उसे वो छड़ी देकर वहा से गयब जाता है, और गोलू गौर से उस छड़ी को देखने लगता है और काफ़ी ख़ुश हो जाता है | ओ अब अपने आप से बोलता है मुझे इसे इस्तेमाल करके रबर को गयब करके देखना परेगा की छारी कम करती हें ? देखना चाहिये , और गोलू जेइसे ही जादुई छड़ी को घूमाता है और उसमे से रोशनी निकलती है और उसका रबर गायब हो जाता है |

तब उसके ख़ुशी से कूदता हे..अरे वाह ये सच मे काम करता “है” मजा आ गया…. ये जादुई छड़ी तो कमाल है |

गोलू उस छड़ी को पा कर काफ़ी ख़ुश हो जाता है और वो बदमासी करना शुरू करदेता है, उसके अंदर की सारी अच्छी आदते ख़त्म होने लगती है और वो शरारत करना ओ शुरू कर देता है | अगले दिन गोलू स्कूल मे जाकर अपने दोस्तों को परेशान करने लगता है और जादू से उनके पेंसिल, कॉपी गायब करने लगता है |गोलू जादुई छड़ी को घूमाता हुआ बोलता ‘है?’ चिंटू की पेंसिल गायब हो जाये, तुरंत ही गयब हो जाने के बाद ओ फिर से बोलता है ? पिंटू की कॉपी गायब हो जाये, देखते ही देखते सबके सामान गायब होने लगते है, सभी बच्चे परेशान होने लगते है | सब इधर उधर अपनी चीजे ढूंढने लगते है |

जादुई छड़ी मिलने के बाद गोलू की सैतानिया

दुसरे तरफ गोलू मनहिं मन मे हस्ते हुए बोलता ‘है?’ मजा आ गया…ये जादुई छड़ी तो कमाल की है मेरी प्यारी जादुई छड़ी | छुट्टी होने पर गोलू घर आता है, शाम का बक्त हो चूका था… गोलू के मन मे फिर शरारत सूझती है, जब गोलू के पापा कुर्सी पर बैठने जा रहे थे की, गोलू तभी जादुई छड़ी घुमाते हुए मन मे बोलता है? “इल्ली… गिल्ली… छू… ये कुर्सी गायब हो जाये” पर जादू उल्टा हो जाता है कुर्सी की जगह गलती से उसके पापा गायब हो जाते है… गोलू अब हबका बक्का हो जाता है, और गोलू रोने लगता है और बोलता है ये क्या हुआ… मेरे पापा… कहा गए ? पापा वापस आ जाओ… गोलू रोता रहता है तभी वहा वो उड़ता हुआ आदमी आ जाता और कहता हे क्या हुआ गोलू |

तब गोलू बोलता हे मेरे पापा गायब हो गए है… मैंने जादुई छड़ी का गलत इस्तेमाल किया है… मुझे. माफ़ कर दो.. ठीक हे बेटे मै तुम्हारे पिताजी को अगर वापस लाऊं गा तब तुम्हे ये जादुई छड़ी मुझे लौटानी होंगी | डरा हुआ गोलू कहता हे ‘हां लेलो… ये छड़ी…. पर मेरे पिताजी को लौटा दो’ | गोलू वो जादुई छड़ी लौटा देता है और वो आदमी जादू से उसके पिता को वापस ले आता है और गोलू रोता हुआ अपने पिता को गले लगा लेता है | और अपने आपसे कहता हे मै कभी सरारत नही करूँगा… पहले जैसा अच्छा काम करूँगा…गोलू वो आदमी का सुकुरिया करने जाता ही है की, वो उड़ने वाला आदमी आसमान मे उड़ जाता है और गायब हो जाता है…और गोलू फिर कभी शरारत नहीं करता है |

सन्देश :-
हमें सिर्फ अच्छा काम करना चाहिये, और अगर कुछ मिलती है तो उस पर लालच नहीं करना चाहिये और हमें अपने अच्छे कामो को छोड़ नहीं देना चाहिये |

समाप्त

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