जादुई दरवाजा | Hindi Kahaniya For Kids | Jadui kahani

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ये कहानी तीन दोस्तों की है जो गाँव  से  होते हुए पैदल  नए  राह  के लिए निकल रहे  थे….

वो तीन दोस्त दिन रात चलते हुए,अपने  मंजिल की  और  बढ़ते  जा  रहे  थे…कु  छ  दू र चलने के बाद सभी काफ़ी थक गए थे, गर्मी काफ़ी थी और तेज  धुप  भी  निकला हुआ था….

“Jadui kahani”

राम : यार कितनी तेज धुप है…अभी और बहुत दूर  चलना  है…

श्याम : हां  यार काफ़ी दू र चलना है… और  ऊपर  से  इतनी तेज धुप है…

राम: मुझसे अब चला नहीं जा रहा है… इतनी तेज धुप दे ख कर मेरी हालत ख़राब हो रही है…

पीछे से गोबिंद बोलता है…

गोबिंद : यार…. मै अब अगर एक कदम भी चला तो वही

गिर जाऊं गा….यार जल्दी से कही रहने का इंतेज़ाम करो…

राम : यार यहाँ कहाँ मिलेगा तुझे रहने के लिए….

श्याम : यहाँ तो दूर दूर तक एक घर नजर नहीं  आ  रहा है…

राम : यार यहाँ एक पेड़ तक नहीं है…

तीनो दोस्त पैदल चलते जा रहते  थे  और  सभी  के चेहरे  से  पसीने  गिर  रहे  थे….सब काफ़ी परे-शान थे….

कुछ दूर चलते ही वहां एक बड़ा सा पेड़ नजर आता है….

राम : यार वहाँ दे खो… थोड़ी दूर मे एक पेड़ नजर आ रहा है…

श्याम : हां यार मुझे भी पेड़ नजर आ रहा है….

गोबिंद : यार तो सोच क्या रहे हो ! जल्दी से चलो……

राम : हां ..हां…. जल्दी चलो…

तीनो दोस्त जैसे  तैसे  चलते  हुए  पेड़  तक  पहूंचते  है  और  पेड़  तक  पहूंचते ही  सभी  चैन  की साँस लेने लगते है और वही बैठ कर आराम करने लगते है….

राम : यहाँ कितनी ठं डक है… कितना आराम है…

गोबिंद : यार अब कु छ दे र यही आराम किया जाये….. अब हमलोगों  को  दो  तीन  घंटे  आराम  करने  के  बाद  ही चला जायेगा…

राम : हां यार जरुर…..

तीनो दोस्त  वही  आराम  करने  लगते  है  और  आराम  करते  करते  वही  सो  जाते  है, सुबह से शाम हो जाती है और सभी वही सोये रहते है…

थोड़ी देर बाद राम उठता है…

राम : यार सभी उठ जाओ… शाम हो गया है…

सभी अंगड़ाई लेते हुए उठते है….

श्याम : अंगड़ाई लेते हुए बोलता है

यार थोड़ी दे र और सोने दो… काफ़ी आंनद आ रहा है..

राम : नहीं यार जल्दी उठो… हमे अब अपने राह मे

निकलना है और गोबिंद को उठाओ जल्दी…

श्याम : हां.. हां… उठता हूँ…

तीनो दोस्त उठते है और फिर से सफर मे  चलने  के  लिए निकालने  है…  रात हो चुकी थी श्याम को एक गुफा दीखता है….

श्याम : यार वहा दे खो एक गुफा है….

राम : यार गुफा मे हमें क्या करना है…हम

अपने  राह  मे   चलते  है….हमें जल्दी  अपने  मंजिल मे पहूंचना है…

श्याम : यार वहां से कुछ रोशनी  आ  रही  है…कुछ  चमक  आ रहा है….

गोबिंद : हां यार सच मे  वहां  कुछ तेज  रोशनी  आ  रही  है…. हमें चल के  देखना चाहिए….

सभी दोस्त  उस  गुफा  की  और  चल  देते  है… वहा  थोड़ी  ही  देर  मे  सभी  अंदर  पहुँचते है  और  पहूंचते ही  गोबिंद  को  एक  सोने  का  सिक्का  ज़मीन  पर  गिरा  हुआ  मिलता  है….

गोबिंद : यार ये देखो एक सोने का सिक्का  मिला मुझे…

श्याम : अरे हां यार सच मे…. ये तो एक सोने का सिक्का है…..

गोबिंद : इसका मतलब अंदर गुफा मे ढेर सारे खजाने

होंगे…. वो सारा खजाना हमारा हो सकता है…

हमे अंदर जाना चाहिए….

राम : नहीं यार… ये हमारा खजाना नहीं है… इसमें  कुछ खतरा हो  सकता  है… हमें  अपने  मंजिल  की  और जाना चाहिए…

राम दोनों दोस्त को काफ़ी समझाता है पर उनके दोस्त नहीं समझते है.

गोबिंद : यार तू बहोत डरपोक है….तुझे चलना है तो चल…नहीं तो हम चले…

दोनों दोस्त अंदर  जाने  लगते  है  और  राम  को  भी  मजबूरन  दोनों  दोस्तों के साथ  अंदर  गुफा मे जाना पड़ता है….

जैसे ही तीनो दोस्त अंदर गुफा मे जाते है… वहां तीन  बड़े  दरवाजे  थे, और  तीनो दरवाजे काफ़ी चमक रहे थे….

श्याम : देखो इन दरवाजो के अंदर ही खजाना छुपा हुआ है…

श्याम : फिर बोलता है

मगर वहां दरवाजे मे कुछ लिखा हुआ है….

गोबिंद : हां यार क्या लिखा हुआ …. मुझे भी कुछ लिखा दिख

रहा है…. पर मुझे समझ नहीं आ रहा है…

श्याम और गोबिंद दोनों  को  वो  भाषा  समझ  नहीं  आती  है  पर  राम  को  वो  भाषा  तुरंत  समझ आ जाती है…

राम : यार ये तो मै पढ़ सकता हूँ… ये मैथली मे  लिखी हुई है…

गोबिंद : पढ़ तो जल्दी पढ़ के बताना क्या लिखा हुआ है…

राम : इस  पर  लिखा  हुआ  है…..ये  तीन  जादुई   दरवाजे है… आपको तीनो मे से सही दरवाजा चुनना  है…. अगर गलत दरवाजा चुना तो आपलोग नर्क´ मे चले जाओगे….

गोबिंद : यार हमे तू डरा रहा है…

राम : नहीं यार… मै सच कह रहा हु… यही लिखा हुआ  है…

गोबिंद और श्याम को  लगता  है  की  राम  उन्हें  डराने  की  कोसिस कर  रहा  है… और राम की बात वो नहीं मानते है और तभी अचानक  तीनो  जादुई  दरवाजा  से  आवाज  आती है…

दरवाजा  “1”

उची आवाज़ मे कहता हें

मेरा पास आओ… मेरे पास ढेर सारे खजाने है….

दूसरा दरवाजा “2”

मेरा पास आओ…. यहाँ है खजाना…

तीनो दोस्त दरवाजा को बोलते देख कर डर  जाते  है… राम

दोतों यहाँ से चुपचप चलो…. यहाँ खतरा नजर आ

रहा है…

गोबिंद : यार तू बहोत डरपोक है… शांत खड़ा रह…

तीसरा दरवाजा

जल्दी से मेरे अंदर आ जाओ…मेरे पास है खजाना….

राम : यार यहाँ खतरा है… अगर  गलत  दरवाजे  मे  गए  तो नर्क मे चले जाओगे…

गोबिंद : यार ऐसा कुछ नहीं होगा… तू मत जाना…

राम : अच्छा ठीक है… मै गुफा  के बाहर  जा  रहा  हूँ…. तुम दोनो जाओ गुफा मे…

श्याम : ठीक है तुम बाहर ही  चले  जाओ. हम  दोनों खजाना अके ले मे बात लेंगे फिर हमसे  मत  मांगना खजाना….

हां ठीक है.. राम

राम बाहर चला जाता है और दोनों दोस्त अंदर  ही  रहते  है… राम  सबका  बाहर इंतजार करता रहता है…

थोड़ी देर बाद गुफा से अचानक तेज रोशनी आते है फिर तुरंत बंद हो जाती है…

राम : अपने आप से कहता हे ये रोशनी कै सी थी… मुझे अंदर जाके  देखना चाहिए…

राम : गुफा  के  अंदर  जाता  है, पर  वहां  उसके   दोनों  दोस्त  नहीं  थे, दोनों  दोस्त  गायब  हो चुके थे और उस जादुई दरवाजे मे बंद हो चुके थे….

राम : अपने आप से बोलता है

मैंने  समझाया  था…पर  मेरी  बात  नहीं मानी इसने….मुझे अब बाहर जाना चाहिए… “Jadui kahani “

“Jadui kahani” राम वहां से निकलता ही  रहता  है  की  वहा  वो  सोने  का  सिक्का  गिरा  हुआ था, राम सोने का सिक्का उठाता है और वहा से अपने मंजिल के लिए निकल पड़ता है….”Jadui kahani”

सन्देश:-

हमें लालच नहीं करना चाहिए,और आच्छे मित्रो की  सलाह हमेसा माननी चाहिए |