जादुई मछली | The Magical Fish | Hindi Story of Jadui Machli

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जादुई मछली

ए कहानी हे एक जादुई मछली के बारे में :

बोहोत समय पहले की बात है एक गााँव में हरिया नाम का एक मछुयारा रहता था | वो हर रोज़ सुबह सुबह मछली पकड़ने निकल जाया कराता था | और मछलियाँ पकड़ के बाज़ार मे बेच देता |  और रस्ते मे चलते वक़्त ओ चिल्लाते हुए कहता  “मछलियाँ .. ताज़ी ताज़ी मछलियाँ ले लो ताज़ी ताज़ी मछलियाँ “ ऐसे ही उसकी जिंदगी कट रही थी ..

पर एक दिन मछलियाँ पकड़ते वक़्त उसके जाल में एक सुनहरी मछली लगी जो काफी चमक रहीं थी, मछली को देखकर ओ छोचता हे,  ये कैसी मछली है ? मैंने पहले तो कभी ऐसी मछली नहीं देखा है. तबही मछली बोलता हें  “मैं जल लोक में रहता हूँ “  यहााँ घुमने के लिए आया था और तुम्हारे जाल में फंस गया .. कृपया मुझे मारना मत इसके बादले में मैं तुम्हे हर रोज़ ढेर साड़ी मछलियाँ दूंगा और तुम्हे मछली पकड़ने के लिए यहााँ आना नहीं पढ़ेगा |

हरिया सब सुनकर कहता हें  “ये  क्या कह रहे हो,  तुम तो खुद ही एक मछली हो तुम भला मुझे मछलिया कहााँ से दे सकते हो?  जादुई मछली जवाब में कहता हें  मैं एक जादुई मछली हूँ .. कृपया करके आप मुझे आपने साथ ले चलो और आपने घार में मुझे रहने के लिए एक छोटी सी जगह दे देना | मैं हर रोज़ तुम्हे एक टोकरी भरकर मछलियाँ दूंगा | जब तुम्हारी गरीबी दूर हो जाये तो,  मुझे वापस यहााँ छोड़ देना मैं आपने जल लोक मे चला जाऊंगा ..  हरिया तबही बोलता हें “ठीक है चलो फिर ..” 

हरिया उस जादुई मछली को लेकर आपने घर चला जाता है (घर में उसकी पत्नी भी होती है ).  और हरिया एक कांच के डिब्बे देखकर  मछली को उसमे छोड़ देता है ..  हरिया की पत्नी हैरान भरी नज़रों से मछली को देखती है और मछली के बारेमे पूछती है ..

हरिया बोलता हे  अपने पत्नी को  “ये एक जादुई मछली है हमे और मछलियाँ पकड़ ने की कोई ज़ारुरत नहीं येही हमे मछलियाँ देगा .. “ये बोलकर दोनों भोजन करने के लिए जाते है ..

आगले दिन सुबह ….

हरिया जब नींद से उठकर अपना सामान लेकर घर का दरवाज़ा खोल ता है … , ओ  देखता है की घर के बहार ‘तिन टोकरी भरी हुयी’ मछलियाँ राखी हुई थी . हरिया देखकर खुस हो जाता है ..  और खुसी के मरे पत्नी से बुलाता हे  “जल्दी बहार आओ देखो हमे क्या मिला है … जल्दी आओ ..”  ये सुनकर हरिया की पत्नी तेजी से बहार आती है और मछलियाँ देख वो भी हैरान हो जाती है ..  हरिया सड़ी मछली वोहिसे से लेकर बाज़ार चला जाता है और मछलियाँ बेचने लगता है | दुसरे दिन भी जब हरिया दरवाजा खोलता है तो बहार ढेर साड़ी मछलियाँ मिलती है , हरिया फिर से साड़ी मछलियाँ  बेच देता है …

धीरे धीरे हरिया काफी अमीर हो जाता है, और गााँव का सबसे अमीर ब्यापारी बन जाता है .. और उसके घर भी काफी आलीशान बन जाता है.  पर एक दिन जब हरिया घरपर था तो मछली उसे कहता है  हरिया .. अब तो तुम गााँव के सबसे अमीर आदमी हो .. क्या अब तुम मुझे नदी में छोड़ आओगे ? बाते सुनकर  हरिया मछली को उठा लेता है नदी में छोड़ने के लिए…  तभी वहीँ  उसकी पत्नी आ जाती है और उसे रोक लेती है .. पत्नी की बात सुनकर हरिया का मन भी लाल्ची हो जाता है , और वो बोलता है ..  “हम तुम्हे छोड़ देंगे लेकिन थोडा और अमीर बन्ने के बाद” | और वो उस मछली को फिर से रख देता है ..

एक दिन हरिया की पत्नी हरिया से बोलती है .. क्यूँ न हम इस मछली को रजा को बेच दे फिर तो रोज रोज के मछलियों से छुटकारा मिल जायेगा ..

हरिया जवाब मे बोलता हे “ बात तो बिलकुल सही है” , मेरे दिमाग में पहले क्यूँ नहीं आया ! कल ही में रजा के पास जाऊंगा इस मछली को लेकर ..

अगले दिन हरिया रजा के पास जाता है और सारी बाते बताने लगता है … रजा उसके बाते सुनकर कहता हें ‘अगर तुम्हारी बात सछ निकली तो मैं तुम्हे उस मछली के बदले 20 गााँव उपहार में दे दूंगा’ | और अगर ये गलत बात हुयी तो तुम्हे अपना बाकि जीवन कारागार में बिताना पढ़ेगा |

दुसरे ही दिन हरिया उस मछली को ले जाकर राजा को देदेता है ..तब तक मछली की चमक जा चुकी थी वो एक आम मछली जैसे लग रही थी ..

राजा जादुई मछली से बोलता हें  “ए जादुई मछली मुझे ढेर सारा सोना चाहिये” ..  तब कुछ नहीं अता.

फिरसे राजा जादुई मछली से कहता हें  ए जादुई मछली मुझे ढेर सारा सोना चाहिये .. देकता हे सोना तो अता ही नहीं.  ओ तब हरिया को बोलता हें , ये मछली तो कोई भी जादू नहीं कर रही .. तुम मुझे मुर्ख समझते हो ?

तुम्हारी इतनी हिम्मत मुझसे चालाकी ! सेइनिको इसे ले जाकर कारागार में बंद कर दो, और इस साधारण मछली को नदी में फेक आओ | हरिया डर जाता हे और कहता हें  महाराज मुझे समा कार दें मुझे समां कर दें मुझे समां कर दें ..  फिरबी हरिया को उम्र भर के लिए करा गार में बंद कर दिया जाता है |

और दूसरी तरफ सेइनिक उस जादुई मछली को वापस नदी में छोड़ देता है .. मछली की चमक वापस आ जाती है और वो हाँसता खेलता आपने जल लोक वापस चला जाता है |  यहााँ हरिया कारागार में बैठा पछताता रहता है …  और अपने आपसे कहता हे  “मुझे अपने पत्नी की बहकाने में नहीं आना चाहिये था” | मैंने लालाच करके बोहोत बड़ी गलती कर दी है .. मैंने लालच करके बोहोत बड़ी गलती कर दी है …

सन्देश :

 हमे किसी लालची इंसान के बातों में नहीं आना चाहिये .. और हमेसा किये गए वादे को निभाना चाहिए..

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