झील का रक्षस| Hindi Kahaniya For Kids | Jhil Ka Rakshas

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-:झील का रक्षस :-

एक जंगल मे ढेर सारे जानवर मिल जुलकर रहा करते थे, उन सभी जानवरो मे काफ़ी

प्रेम था, भालू, खरगोश और बंदरो का समूह सभी मिलकर जंगल मे प्रेम की

भावना से रहते थे….

वही जंगल मे एक झील था, सभी जानवर एसी झील का पानी पीते और उसमे डूबकिया

लगाते | सभी बन्दर और भालू झील मे डुबकी लगाते हुए खेल रहे थे….

बन्दर : कितना मजा आता है… इस झील मे कितना सोहादिस्त

पानी है….

भालू : हां बन्दर मामा… सही कहा… ऐसा झील पुरे जंगल

मे नहीं हें…

बन्दर : हां हां… और सभी जानवर यही पानी पिने आते

है….

भालू : हां सबको पता है…. इस झील जैसा कही और भी

झील नहीं हें…

बन्दर : हां भालू राजा…. और तो और हम यहाँ कितना

खेलते और मस्ती करते है…

भालू : हां बंदर मामा…. ऐसे ही सब मिल-जुल कर यहाँ

रहे और ऐसे ही गाँव मे खुशिया आती रहे….

जंगल के सभी लोग काफ़ी ख़ुश थे, उनकी जिन्दगी खुशिया से भर चुकी थी, रोजाना

हँसते खेलते, गाते और झूमते हुए पानी पीते और आपस मे सबसे बाते करते….

दिन ऐसे ही बीतते जा रहे थे, सभी काफ़ी ख़ुश थे, फिर अचानक एक दिन जंगल मे

एक बड़ा सा बिशाल डरावना रक्षस आ गया…

वो रक्षस काफ़ी डरावना था, उसके बड़े बड़े कान, बड़ी बड़ी आँखे और बड़ा सा हाथ

था…..

उसे देखते ही सभी बन्दर और सभी जानवर वहां झील से दूर हट गए…

बन्दर : पेड़ पर चढ़ कर डरे हुए बोलते है

कितना डरवाना रक्षस है… इससे कै से

बचा जाये… ये तो हमे तुरत मार सकता है…

बन्दर का सरताज : कुछ नहीं होगा… कुछ नहीं करेगा ये….

भालू : डरा हुआ बोलता है

ये तो मुझसे भी बड़ा है… और काफ़ी खतरनाक

है….

बन्दर का सरताज : हां हां ये तो बहोत ही बिशाल है…

थोड़ी देर बाद सभी बन्दर झील के पास पानी पीने जाते है, वो रक्षस तुरंत झील से

बाहर निकल जाता है और जोर जोर से डरावनी आवाजे निकलने लगता है…

रक्षस : सभी जानवर से बोलता है

मै बड़ा दानव हूँ…. और मे यहाँ का अब मालिक

हूँ… और इस झील मे अब से कोई भी नहीं

आएगा… अगर कोई आया तो उसे मै मार के खा

जाऊंगा…. समझे सब….

रक्षस : तुमलोगो की भलाई इसी मे है की तुम सब दोबारा इस

झील मे मत आओ… समझे….

सभी जानवर डर जाते है… उसी जानवर के बीच मे एक छोटा बन्दर बोलता है…

छोटा बन्दर : पर दानव जी…. हम lवहाँ से पानी

पियेंगे… यही झील मे से हम पानी पीकर

अपना ज़िन्दगी काट रहे है…

ये सुनते ही रक्षस और जोर से चिल्लाता है….

रक्षस : मै कुछ नहीं जनता… मै यही सोऊंगा… मुझे किसी प्रकार

की दुबिधा नहीं चाहिये…. और अगर किसी ने

परेशानी दी तो मै उसे खा जाऊंगा….

रक्षस : तुम सब अभी ही यहाँ से भाग जाओ… जल्दी…

सभी जानवर वहा से डरे हुए भागने लगते है, सभी काफ़ी चिंता मे डूब जाते है और

सभी उदास एक जगह कोने मे बैठ जाते है….

बन्दर : अब हम क्या करेंगे हम इस जगह को छोड़ कर

नहीं जा सकते…

भालू : हां हां… हम कैसे अपने झील को छोड़ कर जा

सकते है… हम अपने झील को नहीं छोड़ सकते

है…

बन्दर का सरताज : परन्तु हम कर भी क्या सकते है… अगर हम वहा

गए तो वो रक्षस हम सबको खा जायेगा….

भालू : वही तो बात है… पर हम झील को छोड़ कर जाये

भी तो कहा जाये…

बन्दर का सरताज :

मैंने कुछ दूर मे एक तालाब देखा है, वहा अच्छी पानी

है… हम वही चलते है….

बन्दर : हां हमे अगर जान बचानी है तो हमे वही जाना

होगा….

सभी जानवर एक साथ वो झील छोड़ कर वहां से जाने लगते है, और तालाब के पास

छोटे से जंगल मे डर डर कर जिंदगी काटने लगते है…

सबकी जिंदगी कटने लगती है, वहां का पानी उतना सौअदिस्त तो नहीं था पर रक्षस के

डर से सब वही गन्दा पानी पी रहे थे…

थोड़ी दिनों बाद दुख की घड़ी फिर आ गई, सारे जंगल मे आकाल छा गया… सारे

तालाब सुख गए, सभी रक्षस से तड़पने लगे…

बन्दर : अब हम क्या करे…. प्यास से मेरी जान जा रही

है…

बन्दर का सरताज : मुंझे भी काफ़ी प्यास लग रही है… बिना पानी के

हम जादा दिन तक जी भी नही पाएंगे…

भालू : अब हम क्या करे… आज भी हमारे पुराने झील मे

अच्छी खासी पानी होंगी…पर हम वहां कैसे

जायँगे…

बन्दर का सरताज : हमे वही जाना होगा… हमारे पास काली उपाय भी

नहीं है… हम रक्षस से प्राथना…

भालू : हां हां… सबकोई वही झील मे चलो…

सभी जानवर वापस उस झील मे जाते है वहां जाकर झील के पास प्राथना करते है…

बन्दर का सरताज : रक्षस महराज… हमारी बिनती सुने…

आवाज सुनते ही झील के अंदर से वो दानव बाहर आता है…बाहर आते ही वो सभी

जानवरो पर चिल्लाने लगता है…

रक्षस : तुम सब ने मेरी नीदं भंग कर दी है… मै तुम

सबको खा जाऊंगा… मैंने सबको बोला था की यहाँ

कभी मत आना…

भालू : पर महराज… हम क्या करें…हमारे जंगल मे सूखा

आ गया है…सारे तालाब सुख गए है…

रक्षस : गुस्से मे बोलता है

तो मे क्या करू…

भालू : आप हमे झील का पानी पीने की आज्ञा दे दीजिये…..

रक्षस : चिल्लाते हुए बोलता है

नहीं नहीं बिलकुल नहीं ..अगर किसी ने भी इस

झील की पानी पी… या यहाँ झील के सामने आए तो

मै उसको खा जाऊंगा…

बन्दर और भालू उदास होकर वहा से चले जाते है, और पेड़ के नीचे बैठ जाते है, बन्दर के सरताज को एक अच्छी उपाय मिलती है…

बन्दर का सरताज : मेरे पास एक उपाय है..

भालू : तो जल्दी बताओ… बंदर मामा…

बन्दर का सरताज : आप सब जाओ… और जाके बाँस काट कर ले

आओ…और कुछ जानवर एक बड़ा सा गड्ढा कर

दो…

सभी जानवर तुरंत चले जाते है, और बॉस काट कर तुरंत ले आते है, और कुछ गड्ढा

करने लगते है बंदर मामा उस बॉस को झील के अंदर डूबा देता है और दूसरी तरफ

से मुँह लगा कर पानी खीचता है और पानी आते ही वो गढ़े मे पानी भरने लगता है…

आवाज सुनकर वो रक्षस बाहर आता है लेकिन देखता है की सभी दूर खड़े है, फिर वो

तुरंत झील मे घुस जाता है…

थोड़ी देर मे ही गड्ढा पानी से भर जाता है और सभी पेट भर के पानी पीते है…..

भालू : वहां बंदर मामा… आपने क्या तरकीब निकली है…

बन्दर :

यही तो बुद्धि उपयोग करने का तरीका है…

सभी जानवर पेट भर के पानी पीते है और इस प्रकार सभी रक्षस को बेवकूफ बनाते है

|

सन्देश :-

किसी से भी डरना नहीं चाहिए,  हमे अपने बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए और बुरी परिस्थियो से बाहर निकलना चाहिए |

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