दयावान भुत |Hindi Ghost Story | Dyaban Bhoot

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दयावान भुत -:

एक गाँव मे दो भाई रहते थे, दोनों मे काफ़ी प्रेम भावना थी, एक का नाम रमेश और
दूसरे का नाम सुरेश था | रमेश शहर मे काम करता था, और सुरेश बेचारा कोई काम
नहीं करता था | सुरेश सदैव रमेश से काम के लिए बोला करता था |

सुरेश : (रमेश से कहता है) रमेश कोई मेरे लिए काम है…कोई काम हो तो मुझे

बताना….

रमेश : हां जरुर….अगर कोई काम मिला तो मे तुम्हे जरुर

बोलूंगा…

सुरेश : ठीक है…

रमेश : अच्छा तो मै अभी शहर जा रहा हूँ…तुम्हारे लिए

नौकरी की भी बात करलूँगा….

और रमेश वहा से चला जाता है…और सुरेश गाँव मे ही काम ढूंढने लगता है…

कुछ दिनों बाद रमेश शहर से लौट कर आता है…और सुरेश को देखा कर बोलता

है…

रमेश : अरे सुरेश… तुम्हारे लिए मैंने एक बोहत अ􀇅ी सी

नौकरी ढूंढ़ली है… वो गाँव से थोड़ी ही दूर मे है…

सुरेश : ख़ुश होकर बोलता है सचमे….मुझे नौकरी तो मिल जाएगी ना…

रमेश : हां हां… तुम उस जगह पे चले जाना मैंने पता कर

ली है वहां…

रमेश सुरेश को चिठ्ठी पर पता देता है और बोलता है…

रमेश : ये लो चिठ्ठी… इस लिखा हुए पते पर आज शाम तक

चले जाना… देर कर दी तो नौकरी दूसरे को मिल

जाएगी…

सुरेश : हां हां… मै अभी ही निकलता हूँ.

और सुरेश अपनी साइकिल लेता है और वहा से दी गयी पते पर जाने लगता है…

सुरेश जंगल के सन्नाटे रस्ते से गुजरने लगता है और काफ़ी थक चूका था…. उसे वो

पता मिल नहीं रहा था |

सुरेश : अपने आप से कहता कहाँ आ गया हूँ… कब तक पहुचुँगा दिए गए पते

पर….. मुझे रास्ता समझ ही नहीं आ रहा है…

और वो आगे जाता रहता है तभी कुछ देर बाद उसे वहां एक 12 साल का बालक

मिलता है, वो बालक सुरेश को हाथ देखा कर रोकता है…

बालक : (सुरेश से) अंकल अंकल… मुझे साइकिल पर कुछ दूर ले

चलोगे….

सुरेश : पर मुझे काम पर जाना है… और वहा जल्दी पहुचना

है….

बालक : कहा जाना है… आपको…

सुरेश अपना पता देखाते हुए बोलता है…

सुरेश

मुझे रामपुर के ऑफिस मे जाना है…

बालक : अंकल मै वो जगह जानता हूँ… उसी तरफ मुझे

जाना है… मै आपको वहां तक ले चलता हूँ…

ये सुनकर सुरेश ख़ुश हो जाता है और बोलता है..

सुरेश : ठीक है फिर…चलो मेरे साथ….बैठ जाओ साइकिल

मे….

और वो बालक बैठ जाता है और दोनों साथ साथ वहां से जाने लगते है…

और कुछ ही देर मे वो सुरेश ऑफिस के पास जगह पहुचता है और वहा साइकिल

खड़ा करता है…

और वहा खड़े चपरासी से बोलता है…

सुरेश : चपरासी से बोलता सुनिए भाई साहब….मै सुरेश हूँ.. सामने वाली गाँव

से आया हूँ… और मेरे

भैया ने मालिक से मिलने के लिए बोला है…. तो

मालिक है क्यां…

चपरासी : अंदर अभी मालिक आये नहीं है…वो दो घंटे बाद

आएंगे…

सुरेश : ठीक है फिर.. मै इस बच्चे को छोड़ कर आता

हूँ… फिर मालिक से मिल लूंगा…

चपरासी को वो बच्चे दीखता नहीं है…

चपरासी : कौन बच्चा…

और सुरेश बच्चे की तरफ हाथो से इशारा करता है… और बोलता है…

सुरेश : इस बच्चे के बारे मे बोल रहा हूँ.. मै इसे तुरंत छोड़

कर आता हूँ…

और वो चपरासी जादा ध्यान नहीं देता है और वो वहां से चला जाता है उस बच्चे को

छोड़ने के लिए….

वो टूटी फूटी रास्तो से गुजरता रहता है और काफ़ी सनाटे वाली रस्ते से गुजरता है और

वही रुक जाता है….

बालक : अंकल मुझे यही उतार दीजिये मै यहाँ से चला

जाऊंगा….

सुरेश : इतना ख़राब रस्ते मे कैसे जाओगे तुम… तुम्हारा घर

इन जंगलो मे है…

बालक : हां अंकल…

और वो इतना बोलकर वो बालक वहां से चला जाता है और सुरेश साइकिल लेकर

वापस लौटने लगता है और जैसे ही पीछे मुड़ता है…वो बच्चा गायब हो चूका था |

सुरेश : अपने आप से कहता हे.. काफ़ी जल्दीवो चला गया वो…

और सुरेश वापस ऑफिस की तरफ जाने लगता है…. और जैसे ही वो ऑफिस के

पास पहुचता है…

दूर से ही चपरासी बोलता है….

चपरासी सुरेश से कहता हे साहब अभी नहीं आए है..

अभी एक घंटा और लगेगा…

सुरेश : ठीक है… मै यही इंतजार कर लूंगा…

सुरेश : फिर से बोलता है यहाँ कोई चाय की दुकान हें…

चपरासी : हां हां… दयाने की तरफ जाइये वहा आपको चाय की

दुकान मिल जाएगी…

और सुरेश साइकिल लेकर आगे बढ़ जाता है… और चाय की दुकान के बाहर वो

साइकिल खड़ा करता है और अंदर चाय पीने चला जाता है…

और वो जैसे ही बैठता है उसे वहा उसी बालक की तस्बीर दीवार मे तंगी दिखती है

और उस पर मला लगा हुआ दिखता है…

सुरेश : चायवाले से कहता हे.. चाचा ये बालक कौन है..

चायवाला : बेटा ये मेरा पोता है… इसकी एक दुर्घटना मे मौत

हो गयी है…

ये सुनते ही सुरेश घबराहट से खड़ा हो जाता है और बोलता है…

सुरेश : हड़बड़ाते हुए बोलता है चाचा इसने मुझे रास्ता देखाया है और मै इसे घर तक

छोड़ के आया हूँ.. जंगल के पास…

चायवाला : बेटा उसी जंगल मे मैंने इसे दफनया था… ये बहत

ही अच्छा लड़का था.. सभी राह गिरो को रास्ता

देखाया करता था… और सबकी मदाद करता था… सभी इसे बहत प्यार करते थे…

सुरेश : चाचा… मैंने इसे देखा है… इसने मेरी मदद की

है… और मुझे भी रास्ता देखाया है…

तभी वहा वो चपरासी भी चाय पीने आता है और बोलता है…

चपरासी : अरे तुम कौन सा बच्चे देखा रहे थे…

सुरेश : वही बच्चा… वो इनका पोता था…

तभी वहा एक और आदमी आता है और बोलता है…

आदमी : अरे मुझे एक लड़का मिला… उसने ही मुझे यहाँ

चाय का रास्ता देखाया…

चायवाला : रोते हुए वो जरुर मेरा पोता ही है… जो मरने के बाद भी

सबकी मदद कर रहा है… वो बहत ही अच्छा है… सबकी मदद करता है…

उनकी बात सुनकर सभी को बात समझ आ जाती है और सुरेश और चपरासी को भी

बात समझ मे आ जाती है… और सभी उस बच्चे का सुकुरिया करते है और चायवाला

अपने पोते के बारे मे सोच कर रोते है…

सन्देश :-

हमेसा अच्छा करो…भला करोगे तो लोग मरने के बाद भी याद करते है |

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