दो दोस्त और रक्षस | Hindi Kahaniya For Kids | Jadui Kahani

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दो दोस्त और रक्षस

दो दोस्त और रक्षस-:

एक समय की बात है। एक गाँव मे दो दोस्त थे  एक का नाम कुंदन और दूसरे का नाम रबी था, कुंदन स्कूल जाया करता था, पर रबी गरीब होने के कारण स्कूल नहीं जाता था और रक्षस रहते। 

कुंदन रबी को कहता हें यार चलो आज कुछ खेलते है, रबी कहता हें क्या खेलोगे? मित्र तभी बोलता हें अच्छा तो कबडडी खेलते है। और दोनो बाकि दोस्तों के साथ मिलकर गिल्ली डंटा खेलने लगते है।

काफ़ी देर खेलने के बाद अब वो घर वापस जाने लगे थे, और चलते वक़्त कुंदन बोलता हे रबी से यार कल कहीं घूमने चले! काफ़ी मजा आएगा , और ओ सुनकर कहता हे  “ठीक है यार हम जरुर चलेंगे”। रस्ते मे जाते ही एक आइसक्रीम वाला आइसक्रीम ले-लोआइसक्रीम ले-लो कराकर चिल्लाते हुए उधर से गुजरता है,  आवाज सुनकर  “कुंदन कहता  है” यार चल आइसक्रीम खाते है। कुंदन काफी घमंडी किसम का लड़का था।

कुंदन रबी से कहता हे ‘अच्छा रबी बता आइस का स्पेलिंग क्या हे , उसके आंसर दे नहीं पाने पर कुंदन उसका मजाक बनता हैं और उसे कहता हे  ‘तू काफ़ी कमजोर है और तुझे कुछ नहीं पता’। तबही रबी जवाब मे कहता हें क्या करू मै कमजोर ही सही बिना कुछ बोले शांत से जवाब देता है। और कुंदन कहता हे “मै तुमसे काफ़ी होसियार हूँ और तुमसे काफ़ी समझदार हूँ”। 

तबही रबी सन्ति पुर्बक जवाब मे बोलता हे “हां हां जरुर,  तुम बोहत होसियार हो मै तो बेवकूफ़ हूँ”। दोनों कुछ देर मे अपने अपने घर जाते है। अगले दिन  सुबह कुंदन स्कूल जा रहा था,  और रबी अपने घर से उसे देख रहा था। तबही कुंदन की नजर रबी पर पड़ती हे, और ओ रबी से कहता है “यार मै स्कूल से आता हूँ! फिर शाम मे दोनों घूमने चलेंगे। फिर कुंदन  स्कूल चला जाता है और बेचारा रबी अपने घर मे। 

दिन भर ऐसे ही बैठा रहता है,  रबी पैसे की अभाव से स्कूल नहीं जा सकता था, शाम के बक्त दोनों मिलते है, कुंदन रबी से कहता हे यार कहा चला जाये घूमने के लिए। और रबी कहता हे ‘जहाँ तू बोलेगा’, तब कुंदन जंगल मे घूमने जाने की सुजाव देता हें, बाते सुनकर रबी कहता हे, यार पर मैंने सुना है की वहां दो बड़े बड़े रक्षस रहते  है! रबी की बाते सुनकर कुंदन हस्ता हुआ बोलता हें  “यार तू कितना डरपोक है, इतनी आसानी से हार मान गया”। सरम के मरे रबी बोलता हें  ‘नहीं नहीं मै किसी से नहीं डरता  “हूँ” तुम्हे चलना है तो चलो मै तैयार हूँ’।

दोनों मित्र कुंदन और रबी बिना डरे जंगल की तरफ चले जाते है और दोनों जंगल मे खूब घूमते है, बहुत देर घूमने के बाद कुंदन को बहुत जोर की प्यास लग जाती है। बेचारा कुंदन प्यास के मारे तड़पता हुआ रबी से कहता हे, मित्र अब मे एक कदम भी नही चल सकता ‘हूँ’ काफी थक चूका हु और बहुत जोरो की प्यास भी लगी है। अगर मुझे पानी नही मिला तो में मर जाऊंगा मुझे पानी चाहिए।

तबही रबी कुंदन को बोलता हे यार तुम चिंता मत करो, मे अभी तुम्हारे लिए पानी लाता हूँ….तुम यही पेड़ के नीचे बैठो, फिर कुंदन पेड़ के नीचे बैठ जाता है.  और दूसरी तरफ रबी जंगल मे इधर उधर घूमने लगता है, बहुत देर घूमने के बाद उसे एक कुवा मिल ही जाता है, और उस कुयेमे ऊपर तक पानी भरा हुआ था. रबी को भी काफी प्यास लगी हुई थी ….

पानी देखकर रबी अपने आप से कहता हें “मुझे भी बहुत जोरो की प्यास लगी है …. मुझे भी पानी पि लेना चाहिये”, जैसे ही रबी अपना मुँह कुयेमे डालता है और पानी पीता है…. उस कुवे से दो बड़े बड़े रक्षस निकल आते है …. रबी पीछे हट जाता है पर हिम्मत से काम लेता है…. दोनों रक्षस पूछते है… तुम कौन हो… यहाँ क्या कर रहे हो? और ओ जवाब मे कहता हे मेरा नाम रबी है… मै यहाँ अपने मित्र के लिए पानी लेने आया हूँ… वो पेड़ के नीचे बैठा है और काफ़ी प्यासा है…

सुनकर रक्षस बोलता हे रबी को ‘अगर हमने तुम्हे पानी नहीं लेने दिया तो’| बाते सुनकर रबी गुस्से में बोलता हे, “मै पानी लेकर ही रहूँगा!  चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाये, क्यूंकि मेरा मित्र बहुत प्यासा हे अगर उसे पानी नहीं मिली तो वो मर जायेगा |  रबी की बात सुनकर दोनों रक्षस काफ़ी ख़ुश होते है और उसकी गहरी दोस्ती को देख कर बोलते है मै तुमसे काफ़ी ख़ुश हूँ… तुम बहुत बहादुर बच्चे हो… तुम अपने मित्र की जान बचाने के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हो….. हम तुम्हे कुछ नहीं करेंगे…. दोनों रक्षस जादू से वहां कटोरा लाते है और ढेर सारी मिठाई भी रबी को देते है, और बोलता हे “अपने मित्र के साथ खाओ  हमदोनो रक्षस भी गहरे मित्र ही है, और तुम हमारे जैसे ही अपने दोस्त के गहरे मित्र हो”

आब तुम जाओ और अपने दोस्त को पानी पिला दो… दोनों रक्षस रबी को ढेर सारी मिठाई दे कर भेज देते है, रबी पानी और मिठाई लेकर अपने दोस्त के पास चला जाता है…. रबी के हाथो मे ढेर सारी मिठाई देख कर कुंदन बोलता ह, यार रबी….तुझे इतनी सारी मिठाई किसने दी? तबही रबी अपने मित्र को सारी बाते बताने लगता है और किस तरह उसने कुंदन के लिए अपनी जान भी देने के लिए पीछे नहीं हटा, ये भी वो अपने मित्र को बता देता है…

सारी बाते सुनकर कुंदन के आँखों मे आंसू आ जाते है…. कुंदन रोता हे अपने मित्र को गले लगा लेता है बोलता “हे” तुम्ही मेरे श्चसे मित्र हो… मैंने तुम्हारा बहुत मज़ाक उड़ाया है… मुझे माफ़ कर दो । उसी वक़्त रबी कुंदन को बोलता हे ‘कोई बात नहीं यार तुम मेरे मित्र हो’। 

दोस्त की उदारता देख कर कुंदन रबी से कहत हे, यार रबी अब से तू भी स्कूल जायेगा  मै अपने पिताजी को बोलकर तुम्हारा नाम भी स्कूल मे लिखवा दूंगा… और दोन साथ मे स्कूल जायेंगे….. ये सुनकर रबी ख़ुश हो जाता है और दोनों एक दूसरे के गले लगते गई और अगले दिन से रबी भी स्कूल जाने लगता है…..

सन्देश:-

अच्छा मित्र वही है जो हमारे दुख मे भी हमारे लिए खड़ा हो…. और हमें मुसीबत से बचाये |

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