दो मुँह वाला चिड़िया | Hindi Story | The Mysterious Bird

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दो मुँह वाला चिड़िया

दो मुँह वाला चिड़िया:

 दो मुँह वाला चिड़िया | ए कहानी एक चिड़िया की है, जिसके 2 सिर थे दोनों सिर एक दूसरे से बातें करते और साथ-साथ खाते।  बाया मुँह  दया मुँह से कहता है यार चलो जंगल में जाकर भोजन करते हैं, सुना है कि जंगल में अच्छी भोजन मिलती है। ओर दया मुँह जाने के लिए राजी हो जाता है और वह चिड़िया उड़ने लगते हैं और  दो मुँह वाला चिड़िया साथ में इधर-उधर घूमते रहते हैं। दोनों मुँह अपने आप से कहता है इधर  देखो हरा भरा भोजन है। ओर दोनों मुँह किसके तरफ ज्यादा हरियाली है यही लेकर बहस करने लगते है। आखिरकार  बाया मुँह वाले को मानना पड़ता है और वह दाएं मुँह वाले की बात सुनता है और उसके दिशा की तरफ चल पड़ता है।

दोनों ही नीचे जमीन में उतरते हैं और दोनों अनाज  ढूंढने में लग जाते हैं। चिड़िया की दो सिर होने के कारण पूरा गोल गोल घूमते लगते हैं। और उन्हें थोड़ी देर में एक खेत में अनाज दिखता है।  दोनों फिर से उस खेत के पास जा पहुंचते हैं वहां कौवा, कोयल,  तोता, और कई  जीव पहले से मौजूद थे। सभी उस चिड़िया के दो सिर  होने के कारण काफी डर जाते हैं। और गौर से उस चिड़िया की तरफ देखते रहते हैं।

कौवे तभी अपने मित्रों से कहता है देखो मित्र ए कैसा विचित्र पंछी है इसके दो सिर है,  तोता सुनकर कहता है हां मित्र तुमने सही कहा यह तो चमत्कार ही है,  मैंने तो कभी नहीं देखा ऐसी पंछी।  दोनों उस विचित्र चिड़िया को देखते रहे थे दो सिर वाले चिड़िया यह लोग के समीप आने लगते हैं। विचित्र चिड़िया को अपने पास आता देख   ओ  डर से भागने लगते हैं।  तोता और कौवा उड़ ही  रहे थे कि,  उन्हें उड़ता देख दो सिर वाला पंछी रोकते हुए कहता है रुको दोस्तों डरो मत हमसे और वह सब रुक जाते हैं।

कौवा तभी कहता है तुम हमें दोस्त कह रहे हो।  तभी उस पंछी का दया मुहँ कहता है हां दोस्त को दोस्त ही कहेंगे ना,  तोता तब उससे पूछता है तुम्हारे दो सिर कैसे हुए और तुम्हारे दो सर देखकर हमें डर लग रहा था इसलिए  हम सभी से बात कर रहे थे तुम्हारा सर के बारे में। सभी आपस में ढेर सारी बातें करते हैं और सब में अच्छी खासी दोस्ती हो जाती है सभी एक साथ अनाज खाते हैं, और वहां से उड़ने लगते हैं।

The Story Of a Mysterious Bird whose, have two head | दो मुँह वाला चिड़िया

तभी उस पंछी का बाया मुहँ  कौवे से कहता है अब कहां जाया जाए।  कौवा तभी जवाब में कहता है मैं तो अभी घर जा रहा हूं और तोता भी घर जा रहा है। बाया  मुँह सुन का कहता है तो हम क्या करें हम भी तो घर चले जाते हैं। ओ सुनते ही उसका दायां मुहँ कहता है नहीं मेरा पेट तो नहीं भरा है,  बाया मुँह उसके जवाब में कहता है काफी देर हो गई है  और मैं घर जाना चाहता हूं।

फिर बाया  मुँह कहता हे “मेरा मुँह में तो ज्यादा स्वाद ही नहीं गया है मैं तो खाऊंगा।  दोनों सिर  वाले चिड़िया आपस में ही लड़ने लगते हैं उन्हें समझाते हुए तोता कहता है मित्र तुम लोग लड़ो मत और एक को खाना है तो तुम भी चले जाओ क्योंकि दोनों को तो जाना ही होगा तोता भी कहता है हां मित्र जाओ और दोनों खा कर आओ फिर से।

उसी बक्त बाया सिरको मजबूरन जाना होता है और वह  उड़ते हुए जमीन में आ जाते हैं, ओर दोनों मुहँ आपस मे कहते हे “काश हम अलग अलग होते तो मैं अभी आराम से घर में होता। दया मुँह सुनकर कहता है, हां मुझे भी तुम्हारे साथ रहने में ज्यादा खुशी नहीं होती है। थोड़ी दूर में ही दया सिर को एक सेब दिखता है  और वो सेब के पास जाकर सेब खाने लगता है।

और  खाते हुए कहता है वह कितना स्वादिष्ट फल है मजा  आ गया। बाया सिर चुपचाप उसे खाता देखता रहता है उसे खाता देख उसे भी लालच आने लगता है और वो दया सिर से सेब मांग बैठता है।  दया सर उसे सेव नहीं देता और कहता है मैं अभी खा-रहा हूं इससे ही तुम्हारी पेट भर जाएगी क्योंकि हमारे  पेट एक है।  फिर बाया मुँह कहता है पर मुझे इसका स्वाद चखना है।

दो मुँह वाला चिड़िया | Hindi Moral Story

परंतु दया सिर वाला उसे सेब चकने तक नहीं देता और बाया सिर वाला चिड़िया बस चुपचाप अपने गुस्से को दबाया हुआ  रखता है,  और बदला लेने के  बारे में सोचता रहता है। फिर दोनों उड़कर अपने घर आ जाते हैं वह सभी आराम करते हैं अगले दिन फिर वह भोजन करने के लिए उसी जगह पर आ जाते हैं, वहां तोता, कौवा मौजूद थे। बया सिर वाला तो मन में बदला लेने की ठान चुका था उसे नीचे एक  आम दिखता है वह तुरंत उड़ता हुआ उस आम को खाने के लिए जाता है तभी कौवा उसे कहता है यह मत खाओ यह जहरीला है। जवाब में वह कहता है मैं तो खाऊंगा और इसे नहीं दूंगा, तुम जलो मत मुझसे मैं नहीं खाऊंगा तो तुम इसे अवश्य खाओगे। अब मैं तो खाऊंगा दया सिर वाला चिड़िया बिना किसी के सुने  वह जाकर फल को खा लेता है और खाते ही दोनों वहीं छठपटाने लगते हैं और देखते ही देखते दोनों की जान चली जाती है।

सन्देश :-

हमे गुस्से और बदला भाव से कुछ नहीं करना चाहिये, इससे अपना ही नुकसान होता है|