बदमाश बाइक वाला | The Story Of a Greedy Bike Driver | Badmash Bike wala

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Badmash Bike wala

श्याम नगर नाम की एक गांव में मुकेश नाम का एक लड़का रहता था.. मुकेश को गाड़ियों का बहुत शौक था. मुकेश को अलग-अलग तरह की बाइक्स चलाना बहुत पसंद था.. मुकेश बहुत ही तेज बाइक चलाता.. और सबको पीछे छोड़ देता..

(ओर एकदिन मुकेश अपनी बाइक में शोरूम में गाड़ी देखता है )

 मुकेश :गाड़ी देखने के ओ मानही मन मे छोचटा हे  ‘यह गाड़ी तो बहुत अच्छी है.. इस गाड़ी से तो मैं और भी तेज चल आ पाऊंगा.. हां मुझे यही बाइक चाहिए’…

( मुकेश अंदर जाता है)

 मुकेश : भैया इस बाइक की क्या कीमत होगी?

 मालिक : इस वाले की.. इसकी कीमत ₹100000 रुपए है .. बहुत अच्छी गाड़ी है.. आपको यह गाड़ी कब चाहिए..

 मुकेश: यह गाड़ी मुझे जल्दी चाहिए.. मैं अपने घर से पैसे ले कर आता हूं..

 मालिक : ठीक है आप पैसे ले आइए तब तक मैं यह गाड़ी तैयार करता हूं..

 मुकेश : यह गाड़ी लेकर मैं अपने दोस्तों के पास जाऊंगा. तो सारे मुझसे जलने लगेंगे..

( मुकेश घर पहुंच जाता है )

 मुकेश : पिताजी मैंने एक नई बाइक देखी है.. वह बहुत अच्छी है.. आप मुझे ₹100000 दो मुझे वह गाड़ी खरीदनी है..

 पिताजी : इतने पैसे में कहां से लाऊंगा.. वैसे भी तुम्हारी मां की तबीयत ठीक नहीं रहती.. मैंने पूरी जिंदगी काम करके कुछ ऐसे जोड़े हैं.. वह धीरे-धीरे तुम्हारे मां पर खर्च हो रहे हैं.. ऐसे में तुम्हें पैसे कहां से दूंगा..

 मुकेश : नहीं पिताजी मुझे कुछ नहीं सुनना आप बस मुझे पैसे दो..

 पिताजी : मैं तुम्हें पैसे नहीं दे सकता.. तुम्हारे पास पहले से ही एक बाइक है.. क्या करोगे दूसरी बाइक का..

 मुकेश :  वह बाइक मुझे नहीं चाहिए.. उसे आप रख लो..जा रहा हूं मैं..

( मुकेश घर से बाहर चला जाता है पैदल )

( रात में मुकेश घर की तरफ आता है )

 मुकेश : मुझे पैसे नहीं दिए.. मैं वह पैसे चुरा लूंगा.. जैसे भी हो वह बाइक तो मुझे खरीदनी ही है.. मुझे चुपके चुपके जाना होगा..

 मुकेश : सारे पैसे मैंने ले लिए.. अब मैं चाहता हूं कल सुबह होते ही वह गाड़ी खरीद लूंगा..

( दूसरे दिन सुबह मुकेश दुकान पर )

 मुकेश : भैया मैं पैसे ले आया.. आपको गाड़ी तैयार करो..

 मालिक : कल मैं आपका इंतजार कर रहा था आप आए नहीं..

 मुकेश : कल मैं थोड़ा काम पर बिजी था..

  मालिक : ठीक है.. अभी मैं वह गाड़ी तैयार करता हूं. बस आपको थोड़ी ही देर में मिल जाएगी..

 थोड़ी देर बाद मालिक..

 मालिक : यह लीजिए.. आपकी गाड़ी बिल्कुल तैयार है..

मुकेश गाड़ी के साथ बाहर..

 मुकेश : इस गाड़ी से अब मैं सबको पीछे छोड़ दूंगा.. जरा देखूं तो इसकी स्पीड कितनी है..

 मुकेश : जू जू जू जू जू.. यही है यही है..

( मुकेश एक दूसरे गाड़ी वाले को )

 मुकेश : क्या इतनी ही स्पीड है तुम्हारी गाड़ी की.. मेरी गाड़ी देखो.. बिल्कुल नई है.. मेरे साथ रेस करोगे?

 आदमी : नहीं भाई.. मुझे किसी के साथ रेस नहीं करना.. हमें धीरे गाड़ी चलाना चाहिए..

 मुकेश : तुम यहीं रहो अपनी खटारा गाड़ी के साथ मैं तो चला.. जू जू जू जू जू..

 मुकेश बहुत तेज गाड़ी चलाने लगा.. और रास्ते में सभी गाड़ियों को पीछे छोड़ता गया.. ऐसे ही मुकेश ने पूरा दिन रास्ते में ही गुजार दिए…

 मुकेश : रात हो चुकी है अब मैं घर जाता हूं..

 पिताजी : आ गए तुम.. मुझे तो यकीन नहीं होता मेरे ना कहने के बाद तुम चोरी भी कर सकते हो.. अपने ही घर में चोरी..

 मुकेश : पैसे होने के बावजूद भी आपने मुझे क्यों नहीं दिया.. मैंने जो किया ठीक किया..

 पिताजी : तुम्हारे जैसे बेटे होन से अच्छा है हमारा कोई बेटा ही ना हो… निकल जाओ यहां से..

 मुकेश : मुझे भी नहीं रहना इस घर में.. जा रहा हूं मैं.. अपनी इस गाड़ी के साथ.. मुझे किसी की जरूरत नहीं..

 मुकेश : मैं घर से निकल तो गया.. अब मैं कहां जाऊं.. हां.. जोगेश के पास जाता हूं.. वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त है..

 मुकेश : योगेश भाई घर पर हो.. जरा बाहर तो आओ.. तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है…

 जोगेश : अरे मुकेश इतनी रात में.. सब ठीक तो है ना..

 मुकेश : नहीं कुछ ठीक नहीं है.. मैंने घर छोड़ दिया.. तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो इसलिए मैं तुम्हारे पास आया हूं…

 जोगेश : क्या हो गया.. घर क्यों छोड़ दिया..

 मुकेश : पापा के पास पैसे होने के बाद भी वह मुझे पैसे नहीं दे रहे थे.. इसलिए मैंने पैसे चुराकर यह गाड़ी खरीदी ..तो पापा ने मुझे निकाल दिया..

 जोगेश : तुमने पैसे चुराकर यह गाड़ी खरीदी.. इसमें गलती तो तुम्हारी ही है.. और तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें अपने पास रखूं ..

जोगेश : जो लड़का अपने मां पिताजी का नहीं हो सकता.. वह एक दोस्त का क्या होगा.. चले जाओ यहां से.. आज से तुम्हारा कोई दोस्त नहीं..

 मुकेश : यह तुम क्या कह रहे हो.. ठीक है मैं जाता हूं.. मुझे तुम्हारी भी कोई जरूरत नहीं..

 मुकेश : मुझे किसी की जरूरत नहीं.. मैं अकेले ही ठीक हूं.. जू जू जू जू…… यह यह.. यह…. आ….

(मुकेश गाड़ी से गिर जाता है..)

 मुकेश जब आप खुलता है तो वह हॉस्पिटल में होता है…

 पिताजी : बेटा तुम ठीक तो हो ना..

 मुकेश : पिताजी आप.. आपने तो मुझे घर से निकाल दिया था..

 पिताजी : बेटा हो तो तुम आखिर मेरे ही बेटे.. कितनी देर तुमसे दूर रह सकता हूं..

 मुकेश : पिताजी मुझे माफ कर दे.. मैंने आपके पैसे चुराए.. मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई.. आगे से कभी मैं ऐसा नहीं करूंगा…

 पिताजी : मुझे पता है बेटा तुम आगे से ऐसा नहीं करोगे.. अब जल्दी से ठीक हो जाओ और घर चलो..

 संदेश :

             बिना मेहनत की हासिल की हुई चीजें जल्द ही हम से खो जाती है. मां पिताजी के बात ना मानने वालों को और गलत काम करने वालों को कोई भी पसंद नहीं करता..