बुद्धिमान चाचा कहानी | Hindi Kahaniya for Kids

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ये कहानी मोतीपुर गााँव की है ….

मोतीपुर एक छोटा सा गााँव था और वहाां के लोग भी बोहोत इमानदार थे.. गााँव के लोग एक हमेसा एक दुसरे की मदत करते | उसी गााँव में एक बुज़ुगग इांसान रहते थे सभी उन्हें करीम चाचा कहकर बुलाते | ककसी को भी कोई परेसानी होती तो वो करीम चाचा के पास सलाह लेने पोहोच जाता |
एक दिन …
(रामू दुखी अवस्था में रस्ते से गुज़र रहा था और सामने से भीमा आता है )
( Hindi kahaniya for kids : रामू को देख भीमा रुक जाता है )
भीमा : क्या हुआ रामू भैया.. ककसी परेशानी में हो लगता है ?? क्या हुआ ज़रा हमे भी तो बताओ , हो सकता है तुम्हारे ककसी काम आ जाऊां |
रामू : आब क्या बताऊाँ भीमा भाई मेरा जो पडोसी है ना उसने कुछ कदनों से बोहोत परेसान कर रखा है | कभी मेरे घर के सामने अपना अपना कचरा फेक देता है.. तो कभी हमारा दरवाज़ा खटखटा कर भाग जाता है |
भीमा : तुम करीम चाचा के पास जाओ वही तुम्हारी मदत कर सकते है …
रामू : हााँ तुम ठीक कह रहे हो ..आज ही मैं करीम चाचा के पास जाऊांगा ..
इतना बोलकर रामू वहाां से चला जाता है |
शाम को रामू करीम चाचा के घर जाता है …
(रामू दरवाज़ा खटखटाता है )
रामू : चाचाजी आप हैं क्या … वो चाचा…
करीम चाचा : कौन है बहार ?…
रामू : चाचाजी मैं रामू .. एक छोटीसी समस्या है इसलिए आया हूँ ..
करीम चाचा : रुको आता हूँ …
(करीम चाचा दरवाज़ा खोलते है ..)
करीम चाचा : ओह रामू … चलो बैठकर तुम्हारी परेशानी सुनता हूँ …
(दोनों घर के बहार दबा में बैठ जाते हैं ..)
रामू : चाचा जी वो बात ये है … … ….
करीम चाचा : ये तो बिलकुल छोटीसी परेशानी है | तुम एक काम करो …. ….. ….
रामू : आपका धन्नेवाद चाचाजी मैं आब चलता हूँ …
इतना कहकर रामू वहाां से चला जाता है | अगले दिन सुबह रोज़ की तरह रामू के घर के बहार बोहोत सारा कचरा पड़ा था | पर इसबार रामू गुस्सा नहीं होता है ….
(रामू मजाककया अंदाज में ..)
रामू : ओहो इतना कचरा मरे घर के बहार कैसे आ गया … आब इसका मैं  क्याां करूँ !
(Hindi Kahaniya for Kids : रामू पडोसी के खिड़की की तरफ जकार एक झूट बोलता है )
रामू : अरे ये क्या कचरे में एक सोने की अंगूठी .. भगवन आज तो मेरी लोटरी ही लग गयी | ऐसा कीमती कचरा रोज़ मेरे घर के बहार मिले तो मैं जल्द ही अमीर बन जाऊांगा …
रामू का पडोसी अपने घर से सब सुन रहा था और मन ही मन उसे रामू से इर्षा हो रही थी | इसके बाद पडोसी ने कभी रामू के घर के बहार कचरा नहीं फेका |
इसी तरह करीम चाचा गााँव के सभी की हर छोटी बड़ी समस्या में मदत करते |

एक कदन गााँव का एक ब्यापारी पास के जांगल से अपना सामान कलए बैलगाड़ी से गुज़र रहा था .. तभी वहाां बांदरों के सरदार अपना मांत्री चुनने के कलए सभा कर रहे थे ..
सरदार बन्दर : तुम सभी को हमेशा अपने सरदार का साथ देना चाकहए ताकक मैं तुम सब को मुसीबतों से बचा सकूँ ….
(बांदरों की आवाजें )
तभी सरदार बन्दर की नजर बेलगाडी की तरफ पड़ती है … अचानक गाड़ी पर से एक घांटी कनचे ज़मीं पर कगरती है ..
(……)
सरदार बन्दर : वहाां पर गाड़ी से कगर गया है जाओ और अभी उस चीज़ को यहााँ पर लेकर आओ …
भीड़ में से एक बन्दर जाता है और वो घांटी उठा कर ले आता है …
(बन्दर आवाज़ )
सरदार बन्दर : ये क्या चीज़ है …
(घांटी से आवाज़ कनकलती है जब सरदार बन्दर देखता है हाथो में लेकर )
सरदार बन्दर उस घांटी को अच्छे से देखता है … और सरदार बन्दर को वो घांटी पसांद आ जाती है …
सरदार बन्दर : ये चीज़ तो बोहोत अच्छी है … ये हम बांदरों की सांपकि है …हर रात इसे मेरे कमरे के बहार बजाना .. ताकि ये हमे याद दिलाता रहे की हम बन्दर सबसे श्रेष्ठ जाती है …
इतना कह कर बन्दर अपनी सभा समाप्त करते है और कफर सभी वहाां से जाने लगते है ….
रात को सरदार बन्दर के कहे मुताकबक एक बन्दर सरदार के घर के बहार घांटी बजता रहता है …
(कुछ देर घांटी बजती है — गााँव का सीन आ जाता है )
भीमा : इतनी रात को ये घांकटयों की आवाजें कैसी ?… ककसी की सरारत होगी ..
और वो रात वेसे ही गुज़र जाती है .. दुसरे कदन भी घांटी की आवाज़ आती है और ऐसे ही कुछ कैदीन बीत जाते है आब गााँव के लोग डरने लगे थे . गााँव वालो को लग रहा था की गााँव के जांगल में कोई भूत आया है |
रामू : हम क्या करें वो भूत अगर जांगल से अमरे गााँव में हमला कर दे तो हम कहा जायेंगे ..
भीमा : इस समस्या का कोई समाधान जल्द ही कनकलना पड़ेगा …
भीमा : चलो सब करीम चाचा के पास ,उनके पास इसका कोई हल ज़रर होगा ..
रामू … हााँ चलो चलो…
(चलो चलो भीड़ की आवाज़ )
सभी वहाां से चाचा के घर की तरफ कनकल पड़ते है ….
….
भीमा : चाचा…चाचा क्या आप घर पर हैं ?..
(ठक ठक दरवाज़े की आवाज़ ..)
करीम चाचा : क्या हुआ आज इतने लोग एक साथ यहााँ कैसे आना हुआ ..
रामू : चाचा जी हमारा गााँव मुसीबत में है.. सायद हमारे गााँव के पास वाले जांगल में भूत आया हुआ है ..
करीम चाचा : क्या बोल रहे हो तुम …
भीमा : हााँ चाचा जी रामू कबलकुल सही बोल रहा है .. रोज़ रात होते ही वो भूत जांगल से घांकटयााँ बजाता है ..
करीम चाचा : कुछ आवाज़ तो मेने भी सुनी है मगर ये भूत वाला ककस्सा कैसा है .. तुम में से ककसी ने उस भूत को देखा है ?
भीमा : कोई भी उस भूत के डर से जांगल का रास्ता इस्तेमाल नहीं कर रहा है … ये जानते हुए भी की जांगल में भूत है भला कोई कैसे जाये !..
करीम चाचा : अच्छा तो ये बात है … (करीम चाचा सोंच ने लगते है )
करीम चाचा : बात तो कसफग एक घांटी की है !!! मुझे कुछ लोग चाकहए आज रात हम घांटी की आवाज़ का पीछा करेंगे …
रामू : चाचा जी अगर हम वहाां जाये तो वो भूत हमे खा जायेगा ..
चाचा : भूत को खाना होगा तो वो यहााँ आकर भी हमे खा सकता है | वेसे भी हम छुपकर जायेंगे …
चाचा जी की बात सुन सब सहमत होजाते है..
( रात होती है )
(गााँव Zoom in )
रात होते ही कफर से घांकटयों की आवाज़ सुनाई देने लगती है …
कुछ लोग चचा जी के साथ जांगल के तरफ कनकल पड़ते है और घांटी की आवाज़ का पीछा करने लगते है ..
(….)
(जांगल में कुछ देर चलते है )
भीमा : देकखये चचा जी उस पेड़ से आवाज़ आ रही है …
(भीमा एक पेड़ की तरफ इशारा करता है ..)
सभी उस पेड़ की तरफ देखने लगते है और वो देखते है की एक बन्दर के हाथ में घांटी है और वो बन्दर लगातार उस घांटी को बजाये जा रहा है …
चाचा : अच्चा तो ये बात है ,और तुम लोग बेकार ही परेसान हो रहे थे …
रामू : पर चचा जी हम इससे ये घांटी वापस कैसे ले .. इसने तो हमारी नींद उड़ा राखी है …
चाचा जी : ये तो बोहोत ही आसान है … तुम में से ककसी के पास कोई खाने का सामान है ??
भीमा : हााँ चाचा जी मेरे पास आम है ये चलेगा ?
चाचा जी : कबलकुल चलेगा इधर लाओ …
चाचा जी उस आम को लेकर पेड़ के कनचे रख देते है …
और दूर पास में ही सब एक पेड़ के पीछे चुप जाते है … जैसे ही बन्दर की नज़र आम पर पड़ती है वो बन्दर लपक कर कनचे आता है और घांटी को पास रख कर आम कलए वापस पेड़ पर चला जाता है …
(…..)
चाचा जी : जाओ जल्दी से उस घांटी को उठा लो …
भीमा : जी चाचा जी …
(Hindi Kahaniya for Kids : घांटी सीन म्यूकजक )
घांटी को लेकर सभी वापस गााँव की तरफ आ जाते है .. और उसके बाद ककसी को भी घांटी की आवाज़ नहीं सुनाई देती है ….


सन्देश (Hindi Kahaniya for Kids) :-

मालूली बातों से हमे घबराना नहीं चाहिए .. अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके हम हर परेशानी का सामना कर सकते हैं …