ब्रह्म रक्षस की कहानी | Horror Hindi Story | Saitanhi Duniya

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ब्रह्म रक्षस

ब्रह्म रक्षस  की रूहानी कहानी-:

 ब्रह्म रक्षस | एक समय की बात है। एक गांव में एक पंडित अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था।  उसका घर काफी छोटा था और रहने में काफी दिक्कत भी होती थी। और वो एक दिन  अपने बड़े बेटे से कहता मेरा घर कितना छोटा है और रहने में काफी दिक्कत हो रही है।  पिताजी के बातें  सुनकर बेटा कहता है हां पिता जी आप सही कह रहे  हो,  क्योंकि परिवार बड़ा हो चुका है और हमारा एक ही घर का कमरा है। 

और इसी कारण ही बहुत परेशानी भी हो रही है। उसी समय पंडित के छोटे बेटे वहां पर आता है और अपने पिताजी से कहता है क्यों ना हम एक बड़ा घर बना ले,  बेटे के बाद सुन कर पंडित जी कोई देर सोचते हैं और फिर  बोलते हैं।  बेटा तुम तो सही कह रहे हो हमारे पास एक खेत है ना  वहां हम एक बड़ा घर बना सकते हैं।  ठीक है कल से तब वहीं पर घर बनाना शुरू कर देते हैं। 

 और अगले दिन तीनों बाप बेटा अपने खेत के पास पहुंचते हैं,  और सभी की नजर खेत में मौजूद एक बरगद का विशाल पेड़ पर पड़ती है।  बरगद के पेड़ को देखकर बड़ा बेटा कहता है,  पिताजी एक पेड़ तो बीच खेत में लगा हुआ है हम ऐसे में घर कैसे बनाएंगे।  पिताजी सब सुनकर   बोलता है ,  ठीक है तब हम इसे कटवा देते हैं और फिर इस जगह को खाली करते हैं।

कुछ ही समय बाद सभी बरगद के पेड़ को काटने  लिए जाते हैं,  जोर की हवा और आंधी आ जाती है इस तरह के अचानक मौसम के बदलाव से डरा हुआ छोटा बेटा कहता है पिताजी यह मौसम अचानक बदल  कैसे गया।  बेटे को उसके पिताजी समझा कर कहते हैं कुछ नहीं बेटा बस ऐसे ही होगा, उसे छोड़ो पेड़ को काटने पर ध्यान दो। फिर तीनों मिलकर पेड़ को काटने लगते हैं और तेज सी आंधियां आती रहती है और वह जल्दी ही पूरे पेड़ को काट देते हैं।

 कुछ ही दिनों में वह  एक नया बड़ा घर बना लेते हैं।  दिन बीतने लगते हैं और वह सभी वहीं नए घर में रहने लगते हैं और धीरे-धीरे पंडित जी के व्यवहार में परिवर्तन आने लगता है।  कभी वह गुस्से हो जाते तो कभी अचानक शांत हो जाते हैं, सभी उसे लेकर काफी चिंतित रहते थे।  और 1 दिन पंडित के छोटे बेटे घर से बाहर जा रहा था खेलने के लिए,  बेटे को बाहर निकलता देख  पंडित तभी चिल्लाकर कहता है अंदर चलो और जाकर चुपचाप बैठ जाओ।

अपने पिताजी की डरावनी बातें सुनकर छोटा बेटा डर सा जाता है और उनके आंखों में देखता है, देखते ही देखते हैं पंडित जी की आंखें लाल हो जाती है।  लाला कर देख कर  छोटा बेटा अंदर कमरे में चला जाता है।  कुछ देर बाद वहां उनकी पत्नी आती है और वह कपड़े सजा रही थी पत्नी को देखकर पंडित बोलता है मैं तुम सबको नहीं छोडूंगा मैं तुम सबको मार दूंगा।

 यह सुनते ही उसकी पत्नी घबराई हुई दौड़ते हुए अपने बड़े बेटे के पास भागती है उसका बड़ा बेटा वहां आता है और मां की बताने पर वह पिताजी के पास जा कर देखता है।  जब उसका बड़ा बेटा पिताजी के पास जाता है तो वह देखता है कि उसके पिताजी की आंखें चमक रही है,  पैर और हाथ बड़े बड़े हो चुके हैं।  डरा हुआ बड़ा बेटा अपने पिताजी से पूछता है पिताजी आपको क्या हुआ है आप ठीक  तो है। और वहीं पर उसका छोटा बेटा सब देख रहा था। 

पंडित अभी अपने बेटे से कहता है मैं ब्रह्म रक्षस हूं, और मैं किसी को नहीं छोडूंगा।  तब बड़ा बेटा उस ब्रह्म रक्षस से कहता है क्यों तुम हमारे पीछे पड़े हो हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है।  बातें सुनकर राक्षस तभी कहता है तुमने क्या बिगाड़ा तुमने तो मेरा घर बर्बाद किया है और मैं तुम सब का घर बर्बाद कर दूंगा। और फिर पंडित का बड़ा बेटा  कहता है हमने तो कुछ नहीं किया  आप किस घर की बात कर रहे हो।

 राक्षस तभी कहता है तुमने मेरा बरगद का पेड़ काटा है वह मेरा घर था उस पर मैं रहता था तुमने उसे काट दिया है और अब तुम्हारी बारी है। और पंडित जी के अंदर का ब्रह्म राक्षस चिल्लाता है और अपने हाथों को ऊपर उठाता है और जादू से छोटे बेटे को पकड़ लेता है और उसके गले पर हाथ दबाते हुए कहता है मैं किसी को नहीं छोडूंगा और सबसे पहले तुम्हारे छोटे भाई को मार दूंगा।  तभी छोटा बेटा चिल्लाने लगता है छोड़ दो मुझे छोड़ दो मुझे। उस राक्षस को समझाते हुए बड़ा बेटा कहता है मेरे छोटे भाई को छोड़  दो,  मैं तुमसे माफी मांगता हूं,  हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई है।

उस राक्षस तभी जवाब में कहता है तुमने मेरा घर तोड़ा है वह पेड़ हजार साल पुराना था और तुमने  एक ही पल में ही काट दिया उसे आप मैं तुम्हारे घर को तोडूंगा।  सब सुन कर पंडित जी की पत्नी भी रो-रोकर चिल्लाने लगती है। और उसका बड़ा बेटा भी माफी मांगते हुए कहता है, यह ब्रह्म रक्षस हमें माफ कर दो हमारे पिताजी और हमारे भाई को छोड़ दो और आप ही बताओ हम क्या करें हम कैसे इस गलती का प्रायश्चित करें।

 और सब की मासूमियत देखकर वह भूत थोड़ा शांत हो जाता है,  और उसके छोटे भाई को छोड़ देता है। और घूरते हुए सबसे कहता है  तुम्हें फिर से बरगद के पेड़ लगाने होंगे और वह भी 100  बरगद के पेड़ लगाने होंगे। 100 बरगद के पेड़ लगाने के लिए सब राजी हो जाते हैं,  पंडित के अंदर का भूत उससे कहता है तुम जब सारे पर लगा दोगे तब मैं तुम्हारे पिताजी को आजाद कर दूंगा और मैं यहां से हमेशा के लिए चला जाऊंगा।

देखते ही देखते तभी कोई दिनों बाद वहां घर में पंडित जी आते हैं उन्हें देखकर उसका बेटा कहता है पिताजी आप ठीक है पंडित और चौक के कहता है ठीक हूं मतलब मुझे क्या हुआ था। तब वह सब घटना खुलकर बताता है और फिर सभी एक दूसरे के गले लग जाते हैं और कभी भी हजार साल पुरानी पेड़ को नहीं काट काटेंगे की शपथ लेते  है। अब कभी भी हम हजार साल पुरानी पेड़ को नहीं काटेंगे और सब कुछ पहले जैसा हो  जाता है।

सन्देश :-

कभी भी पुरानी चीजों को नुकसान मत पहूचाओ… ख़ास करके पुरानी हजारों सालो के पेड़ो को… उनमे भी जान होती है और उनके भी घर होते है |