भूतिया बंगला | Hindi Kahaniya For Kids | Bhutiya Bangla

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भूतिया बंगला

भूतिया बंगला की कहानी :

भूतिया बंगला | पहाड़पुर नाम के एक गााँव में ढोलुमल नाम का एक ब्यापारी रहता था। कुछ दिनों से ढोलुमल का ब्यापार बोहोत बुरा चल रहा था। इसलिए उसने कई लोगों से कर्जा भी ले रखा था, कर्ज दार रोज ढोलुमल के घर आते अपना पैसा माांगने ।

उन्ही कर्जा दरो में से दो लोक हर दिन अता था इन कहानी में उन्ही दो लोक को “पहला आदमी/ मिश्रा जी” नाम से चिन्नित किया गया हे :

पहला आदमी बोलता हे अरे ओ भाई ढोलुमल , आज 4 महीने हो गये है । पैसा लेने के समय तो रोज घर आया करते थे। जैसे ही मिल गयी आब तो तुमने उस जगह से गुज़ार न भी बांद कर दिया। ढोलुमल सरम से लाल पिला होकर कहता हें ‘नहीं मिश्रा जी ऐसी कोई बात नहीं है’।

तबही ओव आदमी बोलता हें “ देखो भाई मुझे कुछ नहीं सुनना आज मैं अपना पैसा लेकर ही जाऊांगा “ढोलुमल उसे समझाते हुए कहता हें ‘देखिये मिश्रा जी आज ही मेरी कुछ ग्राहकों से बात हुई है अगले हफ्ते पक्का आपके सरे पैसे लोटा दूांगा’।

ढोलुमल के बाते सुनकर पहला आदमी गुस्से से कहता हें ! ऐसे तुमने कई बार कहा है , आज में कुछ नहीं सुनने वाला। तुम मुझे मेरा पैसा अभी लोटाओ नहीं तो मैं पुलिस के पास जाऊंगा। धमकी सुनकर ढोलुमल फिरसे समझकर कहता हे, ठीक है ठीक है मिश्रा जी आप नाराज मत होइए आज ही मैं आपका सारा पैसा लोटा दूांगा, कृपा करके आप शाम में घर आइये मैं आपका हिसाब कर दूांगा।

फिर पहला आदमी ‘शामको अता हूँ बोलकर’ ओहा से चला जाता हें। कर्जदार चाले जाने के बाद ढोलुमल आमने घरके रामू काका को बुलाकर बोलता हें “देखो काका आज कुछ लोग घर आएांगे और मेरे बारेमे पूछेंगे, आप उन लोगों से कहना मैं घर पर नहीं हूँ”। क्यूंकि मेरे दोस्त

की ताब्यात ख़राब है उसे देखने के लिए गााँव गया हुआ हूँ। एही बाते कहकर ढोलुमल अपने कमरे में जाकर सोचता रहता है की कैसे इन कर्जा दारों से पिचा छुड़ाया जाये, ये कर्जदार तो दिन पर्दीन बड़ते जा रहे है! मैं अभी इस हाल में भी नहीं हूँ की इनका पैसा लोटा पाऊ। क्या करूँ ! कोही रास्ता भी तो नजर में नहीं अरह हे।

देखते ही देखते शाम हो जती हें, कर्जदार भी चला अता हे और रामू काका से कहता हें ‘अरे ओ काका जाओ और ढोलुमल जी को बुला लाओ , वो आज हमे अपना पैसा लोटाने वाले है। परन्तु काका से कहता हें ‘साहब तो घर पर नहीं है’। काका की बात सुनकर कर्जदार गुस्से से बोलता हे घर पर नहीं है मतलब? ओ कहा पर हे , तबही जवाब में काका कहता हे

‘साहब तो गााँव गए हुए है, उनके दोस्त की ताब्यात बोहोत बिगर गयी है इसलिए’। कारदार काका की बाते सुनकर बोलता हें “हम सब समझते है। कोई कहीं नहीं गया है , ये सब हमे पैसे न देने का बहाना है। हम तो यहााँ से सीधा पुलिसके पास जायेंगे।

ढोलुमल और भुतिया बंगला

दूसरी ताराप ढोलुमल घर में बेह्ठे हुए सब सुनता हुआ सोचता हे “आब क्या करूाँगा मैं पुलिस के हाथो चड़ने से अच्छा है मैं यहााँ से भाग जाऊ जब पैसे होंगे तब आऊंगा”। फिर ढोलुमल रातको ही घर छोर कर निकल जाता हे, और ओ बिश्राम करने के लिए कोही जगा धुनता हे, तबही उसे एक पेड़ दिखती हे , एक चाचा पेड़ के निचे बैठे थे। ढोलुमल तबही उस  चाचा कहता हे

मैं बोहोत दूर से आया हूँ! आप बता सकते है यहााँ रहने और खाने के लिए कौनसी जगह सही होगी, जवब में चाचा  कहता हें  “हे..हे… बेटा इस गााँव में कोई भी नहीं रहता”। आज से बोहोत साल पहले ये गााँव उजड़ चूका है। फिरसे ढोलुमल कहता हें  चाचा कम से कम रहने के लिए भी कोई जगह मिल जाती। और चाचा जवाब देता हेंम ‘नहीं बेटा इस गााँव में रहने के लिए कोई जगह नहीं है सिबाय उसके! । ढोलुमल गंभीरता से कहता हें सिबाय उसके?

हा सिबाय उस खतरनाक भूतिया बंगला के ,वहाां पर रहने वाले सभी यात्री को जय जिंह का भूत मार डालता है। चाचा की बाते सुनकर ढोलुमल कहता हे ‘हाहा , चाचा जी आप भी ना काफी अच्छा मजाक करते है। ये मजाक नहीं है बेटा चाचा जी कहते हुए बोलता हें, छोरो चाचा आप बस मुझे जय जिंह का पता बता दीजिये ,आज रात का खाना मैं मिस्टर जय जिंह के साथ ही खाऊंगा। बूढ़े चाचा के समझाने के बाद भी ढोलुमल उस बांगले के रस्ते निकल पड़े।

अरे वो दिख रहा है भूतिया बंगला , पास पोहोचते है  ढोलुमल अंदर जाते है। और अपने आपसे कहता हें लगता है काफी दिनों से कोई नहीं आया यहााँ, ढोलुमल आवाज करता हें “घर पर कोइ है ।घर पर कोई है” , लगता है जय जिंह भैया घूमने गए है। इस बिस्तर में ही मैं आज रात कटाऊंगा! जय जिंह जी बुरा मत मानना आज मैं आप का ये बिस्तर इस्तेमाल करने वाला हूँ। और थका हुआ  ढोलुमल सो जाता है। 

कुछ देर गुजर जाने के बाद भूत घर पर आकार देखता हे, उसके बिस्तर पे एक आदमी लेटे हुए हे। तबही भुत अपने आपसे कहता हें ‘बोहोत समय बाद आज पेट भर खाऊंगा’। नींद तेरी टूटेगी जैसे ही में आऊांगा, ह.ह..ह… बोलकर भुत ओहा से चला जाता हें। सुबह होते ही ढोलुमल के निकट भुत आकार उपस्तित होता हें, और दोलुमल घबरा कर कहता हें। और भुत तभी कहता हे  ‘मैं हूँ आपका दोस्त ,क्या मैं आपकी कुछ सहायता करूँ आप को खा कर’?

ढोलुमल तभी मन में साहस जुगा कर भूत से कहता है,  मैं पागल हूं, जो इस भूतिया बंगला में भूत रहता है जानने के बाद भी रहने आया हूं। वह भूत  भोलू मलके बातें सुनकर पूछता है क्यों आए हो।  ढोलुमल भूत से कहता है मुझे एक ऋषि ने श्राप दिया है कि मरने के बाद मैं भूतों का राजा बनूंगा और भूतों पर बहुत अत्याचार करूंगा। बातें सुनकर भूत हंसता हुआ कहता है ऐसा थोड़ी ना होता है। ढोलुमल तभी गंभीर होकर कहता है ठीक है फिर मुझे मार कर देखो। 

भूत डर जाता है और कहता है मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मालिक, अब ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।  ढोलुमल मन ही मन में हंसता है, और उससे कहता है, ठीक है! आज से तुम मेरे साथ ही रहोगे और मेरा हर कहा मानोगे। भूतों का रजा बनने के बाद मैं तुम्हे मांत्री बनाऊंगा। यह सुनकर भूत कहता है “बहुत-बहुत शुक्रिया आपका मालिक।

थोड़ी देर में ढोलू मल भूत से पूछता हें? कुछ खजाना  बजाना  है या ऐसे ही पहरेदारी करते हो बंगले की?। डरा हुआ भूत तब कहता है खजाना है ना, मालिक आपको चाहिए क्या। तभी ढोलुमल भूत से कहता है जाओ जो भी है लेकर आओ और भूत खजाना लेकर ढोलुमल के पास चले आता है। फिर ढोलुमल उस खजाने से अपना सारा कर्जा चुका कर खुशी खुशी जीवन बिताने लगता है।