भूतिया फ़ोन | Hindi Kahaniya For Kids | Bhutiya Phone

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 -:भूतिया फ़ोन की कहानी:-

This story of Bhutiya Phone : राहुल नाम का एक लड़का अपने मााँ पिताजी और दादाजी के साथ रहता था | राहुल बोहोत शरारत करता और उसे जो चीज़ पसंद आ जाती, वो उसे लेने की जिद करने लगता |

राहुल को स्कूल जाना बिलकुल  पसंद नहीं था ..वो हर रोज़ स्कूल जाने के वक़्त बहाने बनाया करता |

राहुल : पिताजी मेरा पेट बोहोत दुःख रहा है …लगता है आज में स्कूल नहीं जा पाउँगा…

पिताजी : सच में पेट दुःख रहा है ?… ये कोई बहाना तो नहीं ??

राहुल : नहीं पिताजी सच में दुःख रहा है .. अआह्हह्हह …

पिताजी : ठीक है बीटा मैं अभी डॉक्टर को बुलाता हूँ….

राहुल के पिताजी डॉक्टर को फ़ोन करते है …

पिताजी : हेल्लो डॉक्टर साहब ..आि अबिजीथ बोल रहा हूँ … आप अभी एक बार घर आ जाइये .. राहुल का पेट बोहोत दुःख रहा है ..

राहुल : पिताजी मैं अपने कमरे में आराम करने जा रहा हूँ… आप अपने  फ़ोन दीजिये  नहीं तो मैं बोर हो जाऊंगा अकेले …

पिताजी : ठीक है बीटा ये लो …

रहल अिने कमरे में चला जाता है … और फ़ोन फिर गेम खेलने लगता है …

राहुल : इए……ये…..

राहुल : मुझे स्कूल जाना बिलकुल पसंद नहीं , मुझे गेम खेलना और मस्ती करना पसंद  है …ऐसे ही में हर रोज़ बचता रहूँगा …और मुझे स्कूल नहीं जाना परेगा …

(थोड़ी देर बाद डॉ वहां आते है ..)

(डॉ घर के बहार हैं बहार )

डॉ : अबिजीथ बाबु कैसे है ?  

पिताजी : जी डॉ साहब सब बढ़िया, आप  राहुल को एक बार देख लीपजये उसके पेट बोहोत दुःख रहा  है …

डॉ : हां ज़रूर चलिए …

दोनों राहुल के कमरे में जाते है …

डॉ : और बेटा राहुल कैसे हो ?

राहुल : मेरे पेट मे बोहोत दर्द  हो रहा है …

डॉ : अभी मैं देख लेता हूँ  …

डॉ साहब राहुल को सही से देखने लगते है …

डॉ : वेसे तो राहुल बिलकुल ठीक है , मैं कुछ दवाइयां लिख  देता हूँ .. समय समय पर  लेते रहना …

(डॉ दवाई पलखते है )

(डॉ पबस्तर से उठ खड़े होते है )

डॉ : ठीक है आब में चलता हूँ … कोई परशानी हो तो पिर बुला लेना …

पिताजी : ज़रूर डॉ साहब …

राहुल के पिताजी डॉ साहब को दरवाज़े तक छोड़ देते है …

राहुल पिर से फ़ोन फिर गेम खेलने लगता है …

(थोड़ी देर में पिताजी आते है )

पिताजी : बेटा आब फ़ोन देदो और आराम करो …

राहुल : नहीं पिताजी अभी नहीं ,मैं थोड़ी देर बाद दे दूंगा …

राहुल के पिताजी वहां से चले जाते है और राहुल पिर से गेम खेलता रहता है …

रात को राहुल के पिताजी और राहुल खाना खाने के जाते है ..

(दोनों खाना खाते है ..)

(खाना खा लेते है )

पिताजी : बेटा आब जाकर सो जाओ कल तक बिलकुल ठीक हो जाओगे …

राहुल : पापा  मैं बिलकुल ठीक हो चूका हूँ …बाद में सोऊंगा ..अभी नींद नहीं आ रही …

पिताजी : नहीं बेटा बच्चो को इतनी रात जागना नहीं चापहए .. सो जाओ …

राहुल : पापा आप परेसान न हो मैं जल्द ही सो जाऊंगा….

राहुल पिरसे अिने पिताजी का फ़ोन लेकर आपने कमरे में चला जाता है …

राहुल : कितना मजा आता है ऐसे ..स्कूल भी जाना नहीं परता …पूरी रात भी मैं गेम खेल सकता हूँ….

राहुल गेम खेलने लगता है …

(थोड़ी देर गेम खेलते हुए )

राहुल : हा ..हा … ऐसे .. ऐसे .. ओह नहीं …

राहुल : ये .. ये …

रात काफी  हो जाती है …पर राहुल अभी तक फ़ोन लिए जाग रहा था ..

अचानक से टेबल पर से एक गिलास गिर जाता है …

राहुल : ये क्या .. लगता है हवा से गिर गया होगा …पर हवा चल नहीं रही है…छोड़ो जाने दो मैं आपना गेम ख़तम करूँ…

पिर थोड़ी देर बाद हवाए चलने लगती है और राहुल के कमरे की खिड़की हवा के बहाव में खुल जाती है और खड़क ने लगती है …

अचानक से पिर खुद बा खुद कमरे की बत्ती टिमटिमा ने लगती है …

राहुल दर जाता है ..

राहुल : ये क्या हो रहा है !! मुझे दर लग रहा है …

फ़ोन पर से तेज़ रौशनी के साथ अचानक राहुल के सामने एक दनाब प्रकट हो जाता है ..

दनाब : हा .हा.. हा… हा …. कैसे हो राहुल .. बोहोत मज़े में हो लगता है ..तुम हर रोज़ फ़ोन के साथ मस्ती करते रहते हो …इसपलए आज मैं तुम्हारे साथ मस्ती करने आया हूँ …हा हां हा हा ह

राहुल दरसे कापने लगता है …

राहुल : कौन हो तुम ..

दनाब : मैं फ़ोन का भूत हूँ … और तुम तुम मेरा खाना बन्ने वाले हो …

दनाब राहुल को हवा में उदा देता है …

दनाब : हा हा हा हा हा आज में तुम्हे नहीं छोडूंगा ,बोहोत समय से मैं तुम पर नज़र रख रहा था … मुझे ऐसे ही एक बच्चा चापहए जो बिलकुल स्कूल नहीं जाता हो और किसी की भी बात न मानता हो .. जो पसिद सितानिया करता हो ..

दनाब : आब मैं तुम्हे शैतान लोक ले जाऊंगा और आपना भोजन बनाऊंगा … हा हा हा हा …

राहुल : मैं और कभी किसी को परेसान नहीं करूाँगा .. मैं हर रोज़ स्कूल जाऊंगा … पापा की सभी बात भी मानूंगा … मुझे छोड़ दो … मुझे छोड़ दो….मुझे छोड़ दो….मुझे छोड़ दो….

(राहुल की नींद खुलती है …राहुल सिना देख रहा था …)

(राहुल की नींद छोर दो ….)

पिताजी : क्या हुआ बेटा , तुम नींद में जोर जोर से चीख रहे थे ..मुझे छोड़ दो … मुझे छोड़ दो… क्या हुआ कोई बुरा सपना देखा तुमने ?…

राहुल : हााँ पापा सपने में  सिने में एक भूत था …

पिताजी : इसपलए कहता हूँ बेटा रात को समय पर सोना चाहिये.. नहीं तो बुरे सापने आते है और तपबयत भी ख़राब हो जाती है …

राहुल : पापा आप को एक बात कहनी है…

पिताजी : हां बेटा बोलो …

राहुल : पापा मैं आजसे आपकी हर बात मानूंगा और कभी शरारत नहीं करूाँगा …हर रोज़ स्कूल भी जाऊंगा …

पिताजी : तुम सबसे अच्छे बेटे हो … मुझे पता था तुम एक दिन ज़रूर समझो गे ..सब्बास बेटा …

राहुल ने पिर कभी शरारत नहीं की और बोहोत मन लगा कर पढाई करने लगा .. अभी लोग उसे काफी पसंद करने लगे …

राहुल अभी स्कूल जा रहा है….

(राहुल स्कूल के पास है और घंटी बजती है ..)

सन्देश :-

हमें कभी अिने मम्मी पापा को परेसान नहीं करना चाहिये … और हर रोज़ स्कूल जाना चाहिये….