लालची धोबी की कहानी | The Story Of a Greedy Dhobi | Lalchi Dhobi

  • by
लालची धोबी

 लालची धोबी की कहानी -:

एक शहर में एक धनिया नाम का लालची धोबी रहा कराता था | धनिया काफी लालची इंसान था उसे जितना भी जादा पैसे मिल जाते, कभी उसका मन नहीं भरता और वो और जादा पाने के लिए लोगो से झूट बोलता और जादा पैसे मांगता ..और अगर उसे कपड़ों मे से “कुछ कीमती चीज़ मिल जाती या पैसे मिल जाते” तो वो उसे आपने पास ही रख लेता |

धनिया (लालची धोबी) एक माकन में कपड़ो के ‘एक मालिक’ के सामने जाकर बोलता हें  “साहब इस बार मैंने आपके कपड़ों में सबसे मेहेंगा वाला पाउडर इस्तेमाल किया है आप अगर थोड़े और पैसे दे दें तो ! जवाब मे कहता मालिक ठीक है येलो पैसे . तबही धनिया मनही मन मे  कहता हे “ये भी ठीक है” … और उस जाते वक़्त मालिक को बोलता हे  “और कोई कपड़े हैं क्या मालिक”? तबही मालिक बोलता हें

“जाते हुए वो बाकि सरे कपड़े भी लेते जाना (कुछ कपड़ो को दिखाते हुए )  धनिया उन कपड़ों को लेकर वहां से चला जाता है .. धनिया आपने घर पे जाकर सोंचता रहता ‘है ..’ कैसे और जादा पैसे कम सकता हूँ ? मुझे और पैसे चाहिये .. क्यूँ ना मैं कुछ कपड़ों को चुरा कर बेचना सुरु करूँ ! इतने सारे कपड़ों में उसे  कुछ पता भी तो नहीं चलेगा.  और धनिया वेसा ही करता है .. वो कुछ कपड़े चुराकर बेचने लगता है ..  ऐसे उसके पास कुछ और पैसे आने लगते है .. वो थोड़ा खुस हो जाता है .. पर उसकी भूख अब भी नहीं मिटी थी |

धनिया (लालची धोबी) दुसरे माकन में जाता है मालिक के पास कहता हें..

और धनिया बोलता हें.. साहब कपड़े कौन कौन से ले जाऊ ?  तबही मालिक जवाब मे बोलता हें.. “धनिया पिछलीबार सायद मेरे कपड़ों में से दो कपड़े तुम्हारे पास ही रह गये हैं? .. लालची धोबी धनिया कहा “नहीं साहब” मेरे पास तो नहीं है आपने ही कहीं छोड़ दिया होगा , अगर मेरे पास होती तो जरुर मैं आपको वापस कर देता | तब मालिक ठीक है कहते हुए उसे  फिरसे कपड़े देता हे  लेकर जाने के लिए. धनिया कपड़ों को उठा कर वह से चला जाता है | ऐसे ही महीनो बीत जाते है और धीरे धीरे लोगों को समझ आने लगता है की धनिया कपड़ों में से कुछ कपड़े चुरा कर उसे बेच देता ‘है …’  लोग उससे काफी नाराज़ थे लेकिन शहर में कोई और धोबी भी नहीं था जिससे वो अपना काम करवा सकें |

फिर एक दिन शहर में जग्गू नाम का एक नया धोबी आता है

जग्गू  कुछ थैलिओ के साथ पक्के सड़क से पैदल चलकर आते हुए अपने आपसे कहता हें  “क्या पता इस शहर में कितना काम मिलेगा?  मेरे पारिबा का सही से चल जाये बास मुझे और कुछ नहीं चाहिये .. वेसे भी मेरे काम की तो सभी तारीफ कर्ते  हैं .. कोई न कोई तो काम दे ही देगा ..  जग्गू वहां से एक माकन में पोहोच ता है, और उसी मालिक के घर जाकर बोलता हें.. साहब क्या अन्दर आ जाएूँ ?.. मालिक ने कहा क्या हैं बताओ ..

जग्गू बोलता हे दयालु कंठ में कहता हें.. साहब हम धोबी है.. शहर में नए आये है .. आप हमको आपना कपड़ा दे दें मैं बिलकुल नए जैसा चमका दूंगा .. तबही मालिक बोलता हें वेसे ही एक धोबी ने परेसान कर रखा है आब ऊपर से तुम ..मुझे तो आब धोबियो पे बिस्वास नहीं रहा .. जग्गू जवाब देता हें साहब हम आपको कोई सिकयत का मौका नहीं देंगे ..  मालिक  तब उसके बात सुनकर बोलता हे “ रुको ले आता हूँ कपड़े …”  मालिक जाकर अपने कुछ कपड़े उठाता है और वो इस धोबी को परखने के लिए अपने बटुए में कुछ पैसे रख कर एक कपड़े में छुपा देते हुए कहता हें

ये लो कपड़े और अच्छे से साफ़ करना, ख़राब मत करना .. जग्गू  “जी साहब “ कह कर वहां से चला जाता है ..  जग्गू जब कपड़े धोने के लिए तैयार होता है तो कपड़े में से एक बटुआ आ निकलता है .. और वो  मनही मन मे सोचता हे .. ‘अरे रे मालिक ने तो अपना बटुआ कपड़े में ही छोड़ दिया’ मुझे ये जल्द लौटा देना चाहिये .. हो सकता है मालिक का कोई जरुर सामान हो इसमें .. जग्गू कपड़ों को रख कर मालिक के घर जाने लगता है और थोड़ी ही देर में पोहोच जाता है .. और पहुचते ही ओ दरवाज़े के बहारसे  साहब ओ साहब बोलकर मालिक को बुलाता हें  … मालिक बहार आते हैं .. और पूछते हैं .. क्या है ?  जग्गू  जवाब देता हें.. साहब आपने ये बटुआ कपड़ों में ही छोड़ दिया था ..

मालिक ये देखकर बोहोत खुस होता है और वो बोलता है .. साब्बास जग्गू .. तू बोहोत ईमानदार हो तुमने मेरा दिल जित लिया .. आज से मेरे सरे कपड़े तुम ले जाओगे और इस बटुए में जो पैसे है वो तुम्हारे सच्चाई का इनाम है .. ये लो ..

जग्गू सुकुरिया सुकुरिया.. साहिब बोलकर लेलेता हे, कुछ ही दिनों में सबको पता चल जाता है शहर में एक नया धोबी आया है जो बोहोत ईमानदार है .. पैसे भी कम लेता है .. ए बात सुनकर सब जग्गू को ही अपने कपड़े देने लगे थे .. और धनिया को अब कोईभी आपना कपड़ा नहीं देता .. बेचारा धनिया अपनी गलतियों पर रोने लगता है…

सन्देश : हमे कभी भी लालची नहीं बनना चाहिये, इमानदारी से काम करने पर ही हमे सफलता मिलती है …

इन Stories Hindi को भी ज़रूर पढ़ें