सोने का बक्सा| Hindi Story | Magical Box

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-:सोने का बक्सा:-

एक गाँव मे एक बेहद गरीब परिबार रहता था, उसके तीन बेटे थे, दिन रात वो और

गरीब होता जा रहा था, उसका घर भी टूटता जा रहा था….

रामु किसान अब गरीबी की वजह से काफ़ी परेशान रहने लगा…

परेशान होकर सोचता है

में क्या करूँ… इस गरीबी से कै से पीछा

छुड़ाउ…..

किसान :मुझे जल्द ही कोई एक अच्छा उपाय ढूंढना होगा…

उसके तीनो बेटे वहा आते है…..तीनो बेटे अपने खेत से काम कर के लौट रहे थे, और तीनो बेटे अपने पिताजी के आज्ञाकारी बेटे थे….

पहला बेटा : पिताजी आज मैंने खेत को कोड़ दिया है….

दूसरा बेटा : पिताजी आज मैंने खेत पर अनाज बो दिया है…

तीसरा बेटा : पिताजी आज मैंने उस खेत मे पानी डाल दिया है….

तीनो बेटों की बात सुनकर पिताजी थोड़े ख़ुश हो जाते है….

अपने मन मे ही वो किसान सोचता है…

किसान : मन मे सोचता है

अब सायद हमारी गरीबी ख़त्म हो सकती है….

किसान : अपने बेटे से बोलता है

बेटा मै अपने परिबार को लेकर काफ़ी चिंता मे

हूँ…. हमारी गरीबी हमारे परिबार को परेशान करती

जा रही है…

पहला बेटा : पिताजी आप चिंता मत करो…हमारी खेती सब ठीक

कर देगी….

दूसरा बेटा : हां पिताजी हम अपने फसल का इंतजार करते है… थोड़ी ही दिनों मे सब ठीक हो जायेगा….

किसान : हां बेटा… मै तो अब उसी के भरोसे मे हूँ..

तीसरा बेटा : पिताजी हमे कुछ अगला उपाय ढूंढ कर रखना

होगा…. ताकि आगे हमे दिक्कत ना हो…

किसान : हां बेटे ये तुम बिलकुल सही बोल रहे हो…. मै कुछ

ना कुछ सोच कर रखता हूँ….

इस प्रकार तीनो बेटे और किसान मिलकर अपने गरीबी का उपाय ढूंढते रहते है, और

मिलकर समाधान सोचते है….

कुछ दिनों बाद वो सभी अपने खेत मे वापस लौटते है और देखने के लिए जाते है की

उनकी खेती केसी हुई हे…  रास्ते मे वो जाते रहते है…. उनका पहला बेटा बोलता है….

पहला बेटा : पिताजी देखना हमारी खेती अच्छी हुई होंगी….

दूसरा बेटा : हां पिताजी….हमारी खेती जरुर अच्छी हुई

होंगी….

किसान : बेटा अब खेत मे जाकर ही पता चलेगा

हुआ……

जैसे ही सभी खेत मे पहूंचते है, सभी के होश उड़ जाते है, सभी फिर से एक बार

चिंता मे डूब जाते है….

उनकी खेती बर्बाद हो चुकी थी, तेज धुप के कारन सारी फसल बर्बाद हो चुकी

थी…

किसान : सोच मे पड़ जाता है, और तीनो बेटे मायूशी मे चले जाते है….

पहला बेटा : उदास होकर बोलता है

पिताजी हम बर्बाद हो गए…. अब क्या  होगा….

किसान अपने बेटे की हिम्मत बढ़ाते हुए कहता है…..

किसान : बेटा चिंता ना करो सबकुछ ठीक होगा… हम

मिलकर सबकुछ ठीक कर देंगे….

दूसरा बेटा : पिताजी पर अब हमारे पास क्या उपाय है…..हमारे

पास ना खाने को कुछ बचा और

ना ही कुछ पैसे बचे है…. हम तो बर्बाद हो

गए….

तीसरा बेटा भी रोता हुए बोलने लगता है….

तीसरा बेटा : रोता हुआ बोलता है

हां पिताजी….अब हम क्या करें…. हमारे पास

कुछ नहीं  है… हम तो सडक पर आ चुके है….

पिताजी तीनो बेटों को ही हिम्मत देते हुए बोलते है..

किसान : बेटा मै अभी जिन्दा हूँ…. तुम लोगो को कुछ नहीं

होने दूंगा….तुमलोग मेरे साथ चलो….

किसान तीनो बेटों को लेकर घर जाता है, वहाँ अपनी बच्चो पत्नी के साथ घर छोड़ कर बाहर

शहर मे काम करने के लिए जाने लगता है…

पहला बेटा : अपने पितजी से पूछता है

पिताजी हम कहाँ जा रहे है…

किसान : बेटा हम शहर जा रहे है…. वहां कुछ ना कुछ

काम ढूंढ ही लेंगे… और पैसा आते ही अपने घर

वापस आ जायेंगे…

दूसरा बेटा :

हां पिताजी ये सही उपाय है….

सभी कुछ कुछ सामान लिए हुए, पैदल ही शहर निकल जाते है, जाते जाते रात हो

जाती है, और रास्ता भी काफ़ी सुनसान था,  और सामने ही अच्सी एक झोपडी मिल

जाता है…

किसान : बेटा आज रात हम यही कटाते  है… सुबह होते

ही…हम फिर से शहर के लिए निकल जायेंगे….

सभी वही झोपडी मे लेट जाते है, रात काफ़ी हो जाती है,  उस झोपडी के बगल मे ही

एक बरगद का पेड़ था, और उस बरगद के पेड़ मे एक बड़ा सा दानव रहता था,  दानव ने सारे परिबार को देख लिया था……

दानव : डरावनी आवाज मे अपने आप से बोलता है

मै इन सारे परिबार को खा जाऊंगा….इनको परेशान

करूँगा…. और आज बोहत डराउँगा….

डरावनी आवाज सुनकर किसान झोपडी से बाहर आता है और उस दानव को देख लेता

है, परन्तु किसान बिना घबराये साहस से काम लेता है….

और अपने परिबार वालो से बोलता है….

किसान : पहला बेटा से >

बेटा तुम रस्सी बनने वाली जुट ले आओ….

बेटा ले अता हे..

किसान : दूसरे बेटे से बोलता है

बेटा तुम सुई धागा ले आओ…

किसान :  फिर तीसरे बेटे से बोलता है..

बेटा तुम जाकर एक बड़ा सा डंटा ले आओ…

किसान : अपनी पत्नी से बोलता है

तुम रोटिया बनाओ…

किसान की बात सुनकर सभी अपने अपने काम पर लग जाते है, किसान भी पेड़ के

सामने काम करने लगता है…. दानव सब कुछ देखता रहता है

दानव को कुछ समझ नहीं आता है और वो किसान से पूछ पड़ता है…

दानव : किसान से डरावनी आवाज़ मे पूछता है

तुम क्या कर  रहे हो….

किसान : मै रस्सी बना रहा हूँ  …

दानव : इस रस्सी का क्या करोगे…

किसान : इस रस्सी से मै तुम्हे बांधूगा… और पकड़ कर ले

जाऊं गा…

ये सुनते ही दानव डर जाता है और काफ़ी चिंता मे आ जाता है….

दानव : मन मे बोलता है

मुझे इनलोगो से बचना होगानहीं  तो ये मुझे पकड़

कर ले जायेंगे….

दानव डरा हुआ बोलता है….

दानव : किसान मुझे छोड़ दो….इसके बदले मे तुम्हे जो

चाहिये मै वो दूंगा….

किसान :  मन ही मन मे ख़ुश होता है, वो समझ जाता है की ये बिशाल दानव डरपोक

है… किसान अपनी बुद्धि का परयोग करते हुए बोलता है..

किसान : दानव से

मुझे एक सोने से भरा बक्शा चाहिए …. तुम

दोगे तभी मै तुम्हे छोड़ूंगा….

दानव बिना कुछ सोचे समझे अपने ताकत और जादू से वहाँ एक बड़ा सोने से भरा बक्शा ले आता है…

दानव : अपने आप मे जादू करता है

अकड़….बकड…मेरी पुकार सुन… और जल्दी से

सोने से भरा बक्शा आ जा…

देखते ही देखते वहा तुरंत सोने से भरा बक्शा आ जाता है…..दानव किसान को वो

बक्शा देते हुए बोलता है..

दानव : ये बक्शा लो …. और मुझे छोड़ दो..

किसान : ठीक है…. मै तुम्हे छोड़ देता हूँ …

किसान सोने से भरा बक्शा लेता है और ख़ुश होते हुए अपने परिबार के साथ वहां

से वापस अपने घर चला जाता है, सोने से भरा बक्शा देख कर पूरा परिबार ख़ुश होता

है और तुरंत उनकी गरीबी दूर हो जाती है, और वो लोग अमीर बना जाते है, और

एक बड़ा सा नया घर भी बना लेते है…

सन्देश:-

हमे कभी भी किसी से डरना नहीं चाहिये, चाहे वो कितना ही बिशाल और डरवाना क्यूँ

ना हो, हमे आपने बुद्धि का परयोग करना चाहिये, अपने बुद्धि से हम किसी को भी

पराजित कर सकते है |