Paanipuri Wale Ki Safalta | The Sory of Pani Puri | Panchantra Ki Kahaniya

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Paanipuri Wale Ki Safalta

चंपापुरी गांव में धनिया नाम का एक पानी पुरी वाला रहता था, धनिया के पास गोपी नाम का एक इंसान काम करता था | पानी पुरी और उसका मसाला गोपी खुद बनाता, गोपी बहुत ही स्वादिष्ट पानी पूरी बनाता |  धनिया सिर्फ उसे बेचने का काम करता |

( सब पानी पूरी खा रहे हैं )

 आदमी 1 : धनिया जी आपके पानीपुरी बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं, भले ही हमारे गांव में एक ही पानी पुरी का ठेला है, लेकिन आप इतने स्वादिष्ट पानी पूरी बनाते हो कि हम एक ही दुकान से संतुष्ट है |

 धनिया : जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद | आप लोगों का ख्याल रखने के लिए ही तो मैंने यह ठेला लगाया है | देखना आप दिन प्रतिदिन पानी पुरी और भी स्वादिष्ट होंगे मैं बहुत ही महंगे मसाले इस्तेमाल करता हूं |

 आदमी 2 : धनिया भाई आपका पानी पुरी खा कर तो हमारे मुंह में स्वाद जैसे वापस आ जाता है |

धनिया : जी बहुत-बहुत शुक्रिया |

( पानीपुरी का ठेला ज़ूम आउट हो जाता है )

( धनिया घर में/ गोपी पानी पूरी का मसाला बना रहा है/ धनिया पहुंचता है )

 धनिया : और गोपी कैसा चल रहा है काम ?

 गोपी : जी बहुत बढ़िया, मैंने एक मसालों की नई तरकीब खोज निकाली है, इसके बाद से हमारे पानी पुरी और भी ज्यादा अच्छे होंगे |

 धनिया : अच्छा ! यह तो बहुत अच्छी बात है |

 गोपी :हां धनिया जी |बस आप मुझे कुछ मसाले ला देना, उसके बाद देखना मैं पहले से और भी ज्यादा अच्छी पानीपुरी बनाऊंगा |

 धनिया : मसाले तो तुम खुद बनाते हो ना ? तो फिर मसाले लाने की क्या जरूरत |

 गोपी : नहीं धनिया जी, बाकी मसाले तो मैं खुद ही बना लूंगा लेकिन कुछ मसाले हमें बाहर से भी इस्तेमाल करना होगा |

 धनिया : नहीं नहीं ! ज्यादा खर्च करने की कोई जरूरत नहीं | वैसे भी हमारी पानीपुरी पूरे गांव में मशहूर है | जरा सी स्वाद बढ़ाने के लिए हम फिजूल की खर्च क्यों करें !

 गोपी : लेकिन धनिया जी मेरे पास बहुत ही अच्छी तरकीब थी |

 धनिया : अपनी तरकीब अपने पास ही रखो और जैसा काम करते आ रहे थे वैसा करो |

( गोपी उदास हो जाता है )

 गोपी : जी जैसा आप कहें |

 धनिया की बात सुनकर गोपी उदास हो जाता है… और उदास मन में फिर से अपने काम पर लग जाता है | दूसरे दिन फिर से गोपी अपना पानी पूरी का ठेला लगाता है.. और ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं..

 एक दिन ..

( धनिया गोपी के पास घर में.)

 गोपी : मालिक मेरी बेटी की बहुत तबीयत खराब है, क्या आप मुझे ₹50 दे सकते हैं? मुझे उसको डॉक्टर के पास ले जाना होगा |

 धनिया : देखो गोपी तुम उतना काम नहीं करते जितना पैसा मैं तुम्हें देता हूं और ऊपर से ₹50 तुम्हें और चाहिए | नहीं गोपी  मैं तुम्हें पैसे नहीं दे सकता |

 गोपी : लेकिन मालिक मैं पूरे मन लगाकर काम करता हूं, और जितने पैसे आप मुझे देते हैं मैं उससे ज्यादा काम कर लेता हूं |

 धनिया : मुझसे जुबान लड़ आते हो.. चले जाओ यहां से.. आज से तुम्हें काम पर आने की कोई जरूरत नहीं..

  गोपी उदास होकर वहां से अपने घर की तरफ चला जाता है.. और रास्ते में सोचता है..

 गोपी : मैंने मालिक के लिए कितना काम किया और बदले में मालिक ने मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया?

 आज मुझे पता चला किस समय कभी एक जैसा नहीं रहता ..

 अपने बेटी के इलाज के लिए गोपी अपनी साइकिल बेचने चला जाता है.. साइकिल बेचकर गोपी को कुछ पैसे मिल जाते हैं..

 गोपी : साइकिल बेचकर तो मुझे काफी पैसे मिल चुके हैं, पहले मैं अपनी बेटी को डॉक्टर के पास लेकर जाऊंगा, और उसके बाद सोच लूंगा आगे क्या करना है ..

( गोपी अपनी बेटी के साथ डॉक्टर के पास जा रहा है )

( गोपी वापस आकर अकेले बैठा है )

 गोपी : डॉक्टर को ₹50 देने के बाद अभी मेरे पास और हजार  रुपए है | मुझे तो और कुछ काम आता भी नहीं,इससे मैं क्यों ना मैं अपना पानी पूरी का ठेला लगाऊं |

 और दूसरे दिन से गोपी ठीक वैसा ही करता है..

 गोपी : पानी पुरी ले लो.. पानी पुरी… गोपी के स्वादिष्ट पानीपुरी…

 धनिया : गांव के सबसे मशहूर ठेले से ही पानीपुरी लो.. धनिया का ठेला..सबसे मशहूर ठेला..

 आदमी 1 : धनिया के रहते गांव में और कोई भी पानी पूरी वाला अपना व्यापार नहीं कर सकता..

 आदमी 2 :  आपने सही कहा मिश्रा जी.. धनिया का पानी पुरी ही सबसे अच्छा होता है..

 गोपी : उन्हें तो पता भी नहीं है कि वह जो पानी पूरी खा रहे हैं वह मेरी ही बनाई है.. कोई बात नहीं कभी ना कभी तो उन्हें मेरी पानीपुरी चखनी ही होगी..

 ऐसे ही एक हफ्ता भी जाता है.. अब धीरे-धीरे धनिया के पास गोपी की बनाई पानीपुरी के मसाले खत्म हो जाते हैं..

( धनिया पानी पूरी बेच रहा )

 आदमी 1 : अरे धनिया जी आज की पानी पुरी बहुत ही गंदी बनी है..

 आदमी 2 : हां भाई आज की पानीपुरी सच में बहुत ही ज्यादा घटिया बनी है| पानी पुरी बनाना भूल चुके हो क्या?

 धनिया : जी आज मेरी थोड़ी तबीयत खराब थी कल आपको बढ़िया पानीपुरी मिलेगी..

 दूसरे दिन भी फिर से सबको धनिया की पानी पूरी पसंद नहीं आती..

 आदमी 2 : सब चलो भाई आज चुना गोपी का पानी पुरी चखा जाये |

( गोपी के पास जाते हैं )

 आदमी 1 : अरे गोपी हमारे लिए एक एक प्लेट पानी पुरी लगा दो |

 गोपी : जी अभी लगाता हूं..

 जैसे ही वह गोपी की बनाई पानी पूरी खाते हैं वे अचंभित रह जाते हैं ..

 आदमी 2 : वाह भाई वाह.. गोपी तुम्हारे पानी पुरी की तो बात ही निराली है ..अगर हमें पता होता कि तुम इतने अच्छे पानी पूरी बनाते हैं तो हम पहले दिन से ही तुम्हारे पास आते.

 आदमी 1 : सच कहता हूं गोपी आज तक हमने इतने अच्छे पानीपुरी कभी नहीं खाए…

 धीरे-धीरे पूरे गांव में बात फैल जाती है कि गोपी की बनाई पानी पूरी खाकर लोग उस स्वाद को भूल नहीं पा रहे |

 यह खबर जमीदार के पास पहुंचते ही जमीदार गोपी के पास आते हैं..

 जमीदार : कैसे हो गोपी, कैसा चल रहा है तुम्हारा व्यापार ?

 गोपी : जमीदार जी आपने कष्ट क्यों किया? आप मुझे बता देते मैं आपको पानीपुरी देकर आता?

 जमीदार : गोपी हमें कलाकारों की कदर करनी चाहिए..  तुम इतने अच्छे पानी पूरी बनाते हो यह तुम्हारी एक कला है.. क्या मुझे पानी पूरी नहीं दोगे ?

 गोपी : अभी बनाता हूं मालिक …

 ( पानी पुरी खाता है जमीदार )

 जमीदार : वाह.. वाह.. क्या बात है… मैं ने  अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह की पानीपुरी कभी नहीं खाई.. यह लाजवाब है.. सुनो गोपी आज से कोई भी उत्सव हो कोई भी त्यौहार हो मेरे लिए तुम ही पानी पूरी बनाओगे..

 गोपी : जी मालिक आपका बहुत-बहुत शुक्रिया..

 जमीदार : और एक बात कुछ ही दिनों में मेरी बेटी की शादी होने वाली है. वहां पर भी तुम्हें ही पानी पूरी देना होगा..

 गोपी : जी मालिक और भी बेहतर पानीपुरी बनाऊंगा..

 जमीदार : यह लो यह कुछ एडवांस रख लो.. कम पड़े तो मुझे बताना.. और शादी वाले दिन बाकी पैसे भी ले लेना..

 गोपी : मालिक आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ..

 इसके बाद से गांव के सभी गोपी से ही पानी पुरी लेने लगे और धीरे-धीरे गोपी काफी अमीर होता गया.. और दूसरी तरफ धनिया के पानी पूरी ना बिकने पर उसकी हालत बहुत खराब होने लगी.. और उसे अपना पानी पूरी का ठेला भी बंद करना पड़ा..

 जमीदार :  तो देखा ना बच्चों धनिया के साथ क्या हुआ ? कोई अगर हमारे लिए काम करें तो हमें भी उसका ख्याल रखना चाहिए..और हमें अपने कारोबार को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए..