एक छोटे से शहर में, एक पुरानी और रहस्यमय घड़ी की दुकान थी, जो कभी किसी ने ध्यान से नहीं देखी थी। दुकान की खिड़कियां धुंधली और दरवाजे पर जंग लगे हुए थे। लोग उस दुकान के बारे में बहुत कम जानते थे, लेकिन कोई कभी भी अंदर नहीं जाता था।
कहानी का नायक
एक दिन, एक युवा लड़का, अर्जुन, अपने दोस्तों के साथ उस रास्ते से गुजर रहा था। उसकी नजर उस घड़ी की दुकान पर पड़ी, और उसकी जिज्ञासा जागी। उसने सुना था कि वहाँ कुछ खास चीजें मिलती हैं। अर्जुन ने तय किया कि वह अंदर जाकर देखेगा।
घड़ी की दुकान के अंदर अर्जुन ने दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। अंदर की हवा ठंडी और गहरी थी। दीवारों पर अजीब तरह की घड़ियाँ लटकी हुई थीं। एक घड़ी जो खुद ही चल रही थी, और एक घड़ी जो समय से उलटी चल रही थी। दुकानदार एक बुजुर्ग व्यक्ति था, जिसकी आँखों में एक अजीब चमक थी।
जादुई घड़ी
दुकानदार ने अर्जुन को देखा और मुस्कराया। उसने अर्जुन से पूछा, "क्या तुम समय की सच्चाई जानना चाहते हो?" अर्जुन ने सिर हिलाया। दुकानदार ने उसे एक घड़ी दिखाई, जो बिल्कुल अलग थी – यह घड़ी समय को बदलने की क्षमता रखती थी। दुकानदार ने बताया कि यह घड़ी उन लोगों के लिए है जो समय को मोड़ना चाहते हैं।
अर्जुन का दुविधा
अर्जुन थोड़ी देर सोचने के बाद, घड़ी खरीदने का मन बना लेता है। लेकिन उसे एक सवाल था – "क्या मैं सच में समय को बदल सकता हूँ?" दुकानदार ने कहा, "समय बदलने की ताकत केवल उन्हीं को मिलती है जो अपने दिल की सुनते हैं।" अर्जुन ने फिर घड़ी खरीदने का फैसला किया, लेकिन उसे एक चेतावनी भी दी गई – "समय में हस्तक्षेप करने के बाद, तुम्हे उसके परिणाम का सामना करना होगा।"
समय को मोड़ना
अर्जुन घर लौटकर घड़ी को देखता है और सोने से पहले घड़ी को घुमा देता है। अचानक वह खुद को उसी दिन के सुबह में पाता है, जैसे कुछ भी नहीं बदला हो। उसने सोचा कि वह अब कुछ भी बदल सकता है। लेकिन जैसे-जैसे वह समय में और गहराई से हस्तक्षेप करता गया, उसके जीवन में अजीब घटनाएँ होने लगीं।
परिणाम
अर्जुन जल्द ही महसूस करता है कि समय से छेड़छाड़ करने के गंभीर परिणाम होते हैं। वह जितना अधिक समय बदलता, उतनी ही अधिक समस्याएँ पैदा होतीं। उसका परिवार, उसके दोस्त, और शहर में सब कुछ बदलने लगा था। अर्जुन को एहसास हुआ कि समय को वापस जैसे पहले था, वैसा लाना चाहिए।
समय का संतुलन
अर्जुन फिर से घड़ी दुकान में जाता है, जहां दुकानदार ने उसे समझाया कि समय के साथ खेलना कभी भी अच्छा नहीं होता। अर्जुन ने घड़ी वापस दुकानदार को लौटाते हुए कहा, "मैंने अब सीखा कि समय का महत्व क्या है, और अब मुझे उसे संजोकर रखना है।" दुकानदार ने मुस्कराते हुए कहा, "तुम्हारा अनुभव तुम्हे जीवनभर सिखाएगा।"
एक नई शुरुआत
अर्जुन अब एक अलग व्यक्ति बन चुका था। वह समय का सम्मान करने लगा और अपने फैसले समझदारी से लेने लगा। वह जानता था कि समय कभी वापस नहीं आता, और अब उसे हर पल का सही उपयोग करना था।
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